कौन बनेगा हरियाणा का अगला मुख्य सचिव? दावेदारों के नामों पर बढ़ी चर्चा

चंडीगढ़। हरियाणा के प्रशासनिक हलकों में नए मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) के चयन को लेकर सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का सेवा विस्तार आगामी 30 जून को पूरा होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें दोबारा सेवा विस्तार मिलने की उम्मीद बेहद कम है। ऐसे में प्रदेश के इस सर्वोच्च प्रशासनिक पद की कमान किसे सौंपी जाएगी, इसे लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। इस दौड़ में 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुधीर राजपाल, इसी बैच की सुमिता मिश्रा और 1992 बैच के आईएएस अरुण कुमार गुप्ता के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।

वरिष्ठता सूची में सुधीर राजपाल और सुमिता मिश्रा सबसे आगे

सूबे की आईएएस वरिष्ठता सूची पर नजर डालें तो 1990 बैच के सुधीर राजपाल सबसे सीनियर अधिकारी हैं। यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल करने वाले राजपाल वर्तमान में गृह सचिव और वन विभाग के मुखिया हैं। वर्ष 2024 में राज्य के लिंगानुपात में सुधार लाने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है और वे इसी साल नवंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वहीं, इसी बैच की सुमिता मिश्रा वरिष्ठता में दूसरे स्थान पर हैं और फिलहाल वित्तीय आयुक्त (एफसीआर) व स्वास्थ्य सचिव का जिम्मा संभाल रही हैं। गृह सचिव के तौर पर गैंबलिंग एक्ट और ट्रैवलिंग एजेंट बिल लाने में उनकी बड़ी भूमिका रही थी। वे जनवरी 2027 में रिटायर होंगी।

मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र अरुण कुमार गुप्ता भी मजबूत दावेदार

इस रेस में 1992 बैच के आईएएस अरुण कुमार गुप्ता का नाम भी बेहद मजबूती से उभरा है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और वित्त सचिव की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे गुप्ता को सरकार का बेहद खास और भरोसेमंद माना जाता है। बैंक घोटाले की जांच कमेटी के प्रमुख रहे गुप्ता ने हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अस्वस्थ होने के दौरान साल 2026-27 का राज्य बजट समय पर तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि, उनका कार्यकाल इसी वर्ष 30 सितंबर तक ही है। इनके अलावा केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात 1991 बैच के अनिल मलिक और 1993 बैच के वी उमाशंकर के नामों की भी सुगबुगाहट है।

निवर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

दूसरी तरफ, यदि निवर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को नया सेवा विस्तार नहीं मिलता है, तो सरकार उन्हें किसी अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक या प्रशासनिक पद पर समायोजित कर सकती है। वर्तमान में उनके पास 'सेवा का अधिकार आयोग' (राइट टू सर्विस) के चेयरमैन पद का अतिरिक्त प्रभार है और पूर्णकालिक चेयरमैन के रूप में उनकी नियुक्ति की संभावनाएं सबसे अधिक हैं, क्योंकि सरकार ने इस पद के लिए अब तक कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद की कमान सौंपने पर भी उच्च स्तर पर विचार किया जा रहा है।

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