मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा अपने बेबाक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज की एक ऐसी टिप्पणी का समर्थन किया है, जिसने दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में हलचल मचा दी है। यह पूरा विवाद जन सेना पार्टी के जनरल सेक्रेटरी व एमएलसी नागा बाबू के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ।
विवाद की शुरुआत: नागा बाबू का 'अंधभक्ति' वाला पोस्ट?
दरअसल, इस पूरे मसले के तार सीधे तौर पर सियासत और सिनेमा के गठजोड़ से जुड़े हैं। बीते दिनों नागा बाबू ने अपने छोटे भाई और राजनेता-अभिनेता पवन कल्याण (मेगास्टार चिरंजीवी के भाई) की एक तस्वीर साझा की थी। इसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा:"एक लीडर की बात आखिरी होती है। उसके रास्ते में किसी ने शैतान और राक्षस नहीं देखे। सिर्फ वही जानता है कि क्या सही है और क्या गलत। संदेह करना बंद करो, अपनी जबान बंद रखो और बिना कोई सवाल किए लीडर के पीछे चलो।"
नागा बाबू के इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोरीं और बहस छेड़ दी।
प्रकाश राज का तीखा पलटवार: "हम भेड़-बकरी नहीं हैं"
नागा बाबू के इस बयान पर बहुभाषी अभिनेता प्रकाश राज ने कड़ी आपत्ति जताई और उनके पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रकाश राज ने लोकतंत्र की दुहाई देते हुए लिखा: "आपका क्या मतलब है? हम भेड़-बकरियां नहीं हैं और न ही हम गुलाम हैं। लोकतंत्र में सवाल करना हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। जनता के प्रति जवाबदेह होना ही किसी भी नेता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।"
प्रकाश राज की इस दोटूक टिप्पणी ने इंटरनेट पर नेटिजन्स का खूब ध्यान खींचा।
राम गोपाल वर्मा ने दिया प्रकाश राज का साथ
सिनेमाई हस्तियों के बीच चल रही इस बहस में अब निर्देशक राम गोपाल वर्मा भी कूद पड़े हैं। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से नागा बाबू की सोच पर निशाना साधते हुए प्रकाश राज के रुख का खुलकर समर्थन किया है।
राम गोपाल वर्मा ने प्रकाश राज के ट्वीट को साझा करते हुए लिखा:
"बिल्कुल सही! असल में लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) में जनता किसी लीडर को एक जिम्मेदार पद सौंपती है, ताकि वह उनके मसलों और अधिकारों का ध्यान रख सके। जनता ने उसे कोई राजा का ताज नहीं पहनाया है कि उस पर सवाल न उठाए जा सकें।"
चर्चाओं का बाजार गर्म
साउथ फिल्म इंडस्ट्री के इन दिग्गज चेहरों के बीच शुरू हुआ यह वैचारिक मतभेद अब सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया है। जहां पवन कल्याण के प्रशंसक नागा बाबू के बयान का बचाव कर रहे हैं, वहीं आम सोशल मीडिया यूजर्स लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की बात करने के लिए प्रकाश राज और राम गोपाल वर्मा की तारीफ कर रहे हैं।

