TMC में बढ़ी बगावत! ममता के कहने पर भी सीट छोड़ने को तैयार नहीं यूसुफ पठान, पार्टी बैठक में भी नहीं पहुंचे कई दिग्गज

TMC Crisis Deepens : पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना करती दिखाई दे रही है. विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी नेतृत्व ममता बनर्जी की संसद में वापसी की रणनीति पर काम कर रहा है, लेकिन इसी बीच पार्टी सांसद यूसुफ पठान के रुख से पार्टी को लेकर लोगों के बीच बातें शुरु हो गई हैं.

सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी नेतृत्व की ओर से पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली के माध्यम से बहरामपुर लोकसभा सीट से सांसद यूसुफ पठान तक संदेश पहुंचाया गया था कि वे अपने पद से इस्तीफा दे दें. पार्टी की योजना थी कि इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में ममता बनर्जी को उम्मीदवार बनाकर संसद भेजा जाए. हालांकि, बताया जा रहा है कि यूसुफ पठान ने सीट छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है. इस बीच ये भी खबर है कि शुक्रवार को पार्टी ने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें युसूफ पठान नहीं आये. हलांकि इस बैठक को लेकर सांसद कल्याण बैनर्जी ने सफाई दी कि ये पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक नहीं बल्कि नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक थी. इसमें सभी सांसदों और विधायकों को नहीं बुलाया गया था. कुछ सांसद जो कि वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं, वे इसमें वर्चुअल मोड़ में शामिल हुए.

TMC Crisis Deepens : ममता को संसद पहुंचाने के लिए विकल्प तलाश रही है TMC

यूसुफ पठान के कथित इनकार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस की नजर बसीरहाट लोकसभा सीट पर है. बसीरहाट से सांसद हाजी नूरुल की मृत्यु के बाद यह सीट खाली हो गई है और पार्टी नेतृत्व यहां से ममता बनर्जी को चुनाव लड़ाने पर विचार कर रहा है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ममता बनर्जी को संसद में भेजना पार्टी की प्राथमिकता है, तो बसीरहाट उपचुनाव TMC के लिए सबसे व्यवहारिक विकल्प बन सकता है.

28 साल के इतिहास में सबसे बड़ा संकट?

तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद से पार्टी और ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान लगभग एक-दूसरे की पर्याय रही है. लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने पहली बार पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

विधानसभा चुनाव में हार और बड़ी संख्या में विधायकों की नाराजगी ने पार्टी संगठन को झकझोर दिया है. माना जा रहा है कि कई नेता पार्टी की भविष्य की दिशा और नेतृत्व संरचना को लेकर असहज हैं.

अभिषेक बनर्जी को लेकर बढ़ा असंतोष

टीएमसी के भीतर उभर रहे असंतोष का बड़ा कारण ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी माना जा रहा है. असंतुष्ट खेमे के कई नेताओं ने खुले तौर पर अभिषेक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.

हालांकि, अधिकांश नेता अभी भी ममता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के अंदर उत्तराधिकार की राजनीति को लेकर मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं.

लोकसभा और राज्यसभा तक पहुंच सकता है संकट

फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर गुटबाजी और बढ़ती है तो इसका असर संसद में उसकी ताकत पर भी पड़ सकता है.

पार्टी नेतृत्व की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि विवाद गंभीर रूप लेता है और मामला चुनाव आयोग तक पहुंचता है, तो पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘घास-फूल’ को लेकर भी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई छिड़ सकती है.

बंगाल की राजनीति पर क्या होगा असर?

यूसुफ पठान द्वारा सीट छोड़ने से इनकार की खबर ने यह संकेत दिया है कि TMC के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है. यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते असंतोष को नियंत्रित नहीं कर पाया, तो इसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की भूमिका पर पड़ सकता है.

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी संसद पहुंचने के लिए कौन-सा रास्ता चुनती हैं और पार्टी अपने भीतर बढ़ रही असहमति को कैसे संभालती है.

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