कोलकाता। पश्चिम बंगाल के भांगर विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। देश की इस प्रमुख जांच एजेंसी ने राज्य के अलग-अलग इलाकों में कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी कमान एनआईए को सौंपी है, जो अब मामले की तह तक जाने के लिए हर संदिग्ध पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
भारी मात्रा में मिले थे बम और बारूद
इस पूरे मामले की शुरुआत 25 अप्रैल को हुई थी, जब उत्तर काशीपुर थाने में एक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई थी। स्थानीय पुलिस को सूचना मिली थी कि दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर इलाके में भारी मात्रा में बारूद और बम छिपाकर रखे गए हैं। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने छापेमारी की और मौके से 79 देसी बम, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और बम बनाने का दूसरा सामान बरामद किया था। इतनी बड़ी तादाद में गोला-बारूद मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने इसकी जांच एनआईए को सौंप दी, जिसने 26 अप्रैल 2026 को इस केस को औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले लिया।
बड़े नेटवर्क की तलाश, डिजिटल सबूत जब्त
गुरुवार को हुई इस छापेमारी के दौरान एनआईए के अधिकारियों ने कई संदिग्ध ठिकानों को खंगाला। इस कार्रवाई में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (जैसे मोबाइल और लैपटॉप) और अन्य जरूरी साक्ष्य जब्त किए गए हैं। एनआईए अब इन डिजिटल और कागजी सबूतों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे खेल के पीछे किसका दिमाग है, इन बमों को बनाने के लिए पैसा कहां से आ रहा था और आरोपियों का नेटवर्क कहां-कहां फैला हुआ है। जांच अधिकारियों का कहना है कि बरामद विस्फोटकों के पीछे छिपे असली मकसद को सामने लाने के लिए जांच को हर एंगल से आगे बढ़ाया जा रहा है।

