“वीना विजयन और CMRL को बड़ा झटका; हाईकोर्ट ने ED जांच पर रोक लगाने से किया साफ इनकार”

कोच्चि। आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस और उसकी प्रमोटर वीना विजयन को तगड़ा झटका लगा है। केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को बहुचर्चित सीएमआरएल-एक्सालॉजिक वित्तीय लेन-देन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तफ्तीश पर तुरंत रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के इस रुख के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी के लिए मामले की जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

चुनावी राजनीति का केंद्र बना रहा विवाद

यह अदालती आदेश ऐसे समय में आया है जब पिछले हफ्ते ही ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के आवास सहित करीब 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां उनकी बेटी वीना विजयन भी रहती हैं। इस कार्रवाई के बाद कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने राहत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह पूरा विवाद बीते दो सालों से केरल की सियासत के केंद्र में रहा है और हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान भी यह विपक्ष के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना था। कोर्ट ने शुरुआती स्तर पर जांच रोकने से मना करके ईडी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक बड़ी कानूनी बढ़त दे दी है।

अदालत ने कंपनी की दलीलों पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सीएमआरएल ने दलील दी कि ईडी ने किसी औपचारिक एफआईआर के दर्ज होने से पहले ही अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए यह कार्रवाई शुरू कर दी। कंपनी ने यह भी कहा कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) की कार्रवाई एक राजनीतिक शिकायत पर आधारित है। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सवाल किया कि आखिर जांच एजेंसी को अपना काम पूरा करने से क्यों रोका जाना चाहिए? पीठ ने टिप्पणी की कि यदि कंपनी पाक-साफ है, तो वह जांच अधिकारियों के सामने अपने सभी जरूरी दस्तावेज पेश कर सकती है, जिससे सच सामने आने पर उसे क्लीन चिट मिल जाएगी। कोर्ट ने यह भी पूछा कि कंपनी एक्सालॉजिक के साथ हुए लेन-देन के रिकॉर्ड दिखाने से क्यों हिचक रही है।

करियर और सियासत पर पड़ेगा गहरा असर

इस मामले की शुरुआत आयकर निपटान बोर्ड की उस रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि सीएमआरएल ने बिना कोई सेवा लिए ही एक्सालॉजिक कंपनी को मोटी रकम का भुगतान किया था। ईडी इसी वित्तीय हेराफेरी को मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिए से देख रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमआरएल की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने पैरवी की, जबकि ईडी का पक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने रखा। फिलहाल कोई अंतरिम राहत न मिलने से ईडी के पास संदिग्धों को समन भेजने और पूछताछ तेज करने के पूरे अधिकार सुरक्षित हैं। इस केस से जुड़े बड़े सियासी चेहरों को देखते हुए इसके अंतिम नतीजों का केरल के राजनीतिक भविष्य पर गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

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