Iran Attacks US Airbase : पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. ईरान ने अमेरिका के हालिया सैन्य हमलों के जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है. इस हमले में कई अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की खबर है, जबकि अमेरिकी सेना के दो अत्याधुनिक MQ-9 रीपर ड्रोन भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं दोनों देशों के बीच जारी नाजुक युद्धविराम अब टूटने की कगार पर दिखाई दे रहा है.
🚨 JUST IN: Reports say an Iranian missile strike on a U.S. military base in Kuwait injured five American personnel and damaged an MQ-9 Reaper drone.
The strike reportedly came after what Tehran described as a ceasefire violation by the United States, further escalating tensions… pic.twitter.com/wzyTuAs93Z
— IRGC NEWS (@IRGC_IRAN_News) May 30, 2026
Iran Attacks US Airbase:IRGC ने ली हमले की जिम्मेदारी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि गुरुवार सुबह उसके बलों ने उस अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया, जहां से ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों, विशेषकर बंदर अब्बास इलाके में सैन्य कार्रवाई की गई थी. ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे “अमेरिकी आक्रामकता के खिलाफ जवाबी कार्रवाई” बताया है.
कुवैत स्थित अमेरिकी एयर बेस बना निशाना
अमेरिकी अधिकारियों ने भी हमले की पुष्टि की है. उनके अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान ईरान ने कुवैत में स्थित ‘अली अल सलेम एयर बेस’ पर फतेह-110 बैलिस्टिक मिसाइल दागी. हालांकि, कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने मिसाइल को हवा में ही इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन उसका मलबा एयर बेस परिसर में गिरा. इसी वजह से कई अमेरिकी सैनिक घायल हो गए.
अमेरिका के करोड़ों डॉलर के रीपर ड्रोन को भारी नुकसान
हमले में अमेरिका के दो बेहद महत्वपूर्ण MQ-9 Reaper ड्रोन भी प्रभावित हुए हैं. इनमें से एक ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गया, जबकि दूसरा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है.
एक MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत करीब 3 करोड़ डॉलर होती है. ये ड्रोन अमेरिकी सेना के लिए बेहद अहम हैं और इनका उपयोग खुफिया निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक हवाई हमलों के लिए किया जाता है.
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इन ड्रोन का नुकसान अमेरिकी सैन्य क्षमताओं के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है.
ट्रंप ने बुलाई हाई लेवल बैठक
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की.
बैठक में ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के प्रस्तावित समझौते पर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका.
समझौते पर अभी नहीं बनी सहमति
बैठक से पहले ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह जल्द ही इस मुद्दे पर अंतिम फैसला ले सकते हैं. हालांकि, करीब दो घंटे चली बैठक बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई.
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति केवल उसी समझौते को मंजूरी देंगे जो अमेरिका की सुरक्षा शर्तों को पूरा करे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करे।
60 दिन के युद्धविराम विस्तार पर चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच एक प्रारंभिक समझौते पर चर्चा हुई है. इस प्रस्ताव के तहत मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर नई वार्ता शुरू करने का सुझाव दिया गया है.
हालांकि, ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि समझौता अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है.
पश्चिम एशिया में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौते पर सहमति नहीं बनती है, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहरा सकता है. अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए इस ताजा हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.
आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और तेहरान के फैसले यह तय करेंगे कि हालात युद्ध की ओर बढ़ेंगे या कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे.

