नई दिल्ली | दिल्ली पुलिस की साख को बट्टा लगाने वाली एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। इस बार पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के निजी सहायक (पीए) रहे उप-निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) प्रदीप कुमार रांगी पर गंभीर आरोप लगे हैं। एसआई रांगी पर कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर एक नामी कारोबारी से मांगी गई 5 करोड़ रुपये की रंगदारी का सौदा महज 2 करोड़ रुपये में तय (सैटल) कराने का आरोप है। इस मामले में संदेहास्पद भूमिका उजागर होने के बाद पुलिस महकमे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी एसआई प्रदीप को सस्पेंड कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय तफ्तीश के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
गैंगस्टर के नाम पर मांगी गई थी 5 करोड़ की रंगदारी
पूरा मामला एक बड़े उद्योगपति से जुड़ा है। हरियाणा की बहादुरगढ़ पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पंजाबी बाग के रहने वाले और एक्वालाइट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेंद्र कुमार को बीते 16 अप्रैल को हरियाणा के कसार गांव स्थित उनकी फैक्ट्री में एक अंतरराष्ट्रीय नंबर (+44 कोड) से धमकी भरा फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का बताते हुए उनसे 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। रकम न चुकाने की सूरत में कारोबारी और उनके पूरे परिवार को जान से मारने की खूंखार धमकी दी गई थी।
एसआई ने कराया 2 करोड़ में सौदा, दोबारा फोन आने पर खुला राज
आरोप है कि इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप ने मध्यस्थता करते हुए रंगदारी की भारी-भरकम राशि का सौदा 2 करोड़ रुपये में फिक्स करा दिया। पीड़ित कारोबारी ने बदनामी और जान के डर से 2 करोड़ रुपये दे भी दिए, जिसके बाद मामला कुछ समय के लिए शांत हो गया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गों ने उसी कारोबारी से दोबारा 2 करोड़ रुपये की नई डिमांड कर दी। इस बार परेशान होकर पीड़ित ने सीधे हरियाणा के बहादुरगढ़ सेक्टर-6 थाने में शिकायत दर्ज करा दी। बहादुरगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रंगदारी वसूलने वाले गैंग के कई गुर्गों को दबोच लिया, जिनसे पूछताछ में दिल्ली पुलिस के इस एसआई का नाम सामने आया।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरफ्तारी और निलंबन
इस पूरे आपराधिक सिंडिकेट में अपना नाम उछलने के बाद एसआई प्रदीप कुमार ने गिरफ्तारी से बचने के लिए झज्जर की अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 मई को उसकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसके बाद हरियाणा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हरियाणा पुलिस की लिखित सूचना मिलने पर बाहरी-उत्तरी दिल्ली के डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने आरोपी एसआई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। चूंकि आरोपी की मूल तैनाती बाहरी-उत्तरी जिले में थी, इसलिए वहीं से यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।

