भारत के सामने ‘डबल खतरा’! डरा रही IISS की 150 पन्नों की रिपोर्ट, चीन-पाक की ‘हाइब्रिड जंग’ का बड़ा खुलासा

Asia Pacific Security Report नई दिल्ली/सिंगापुर :शंगरी-ला संवाद से पहले एक बड़ा खुलासा हुआ है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा और रणनीतिक संतुलन को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. सिंगापुर में इस सप्ताहांत आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रक्षा संवाद ‘शंगरी-ला संवाद’ से ठीक पहले जारी इस रिपोर्ट ने वैश्विक मंच पर हलचल तेज कर दी है. लंदन स्थित प्रसिद्ध थिंक-टैंक ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ (IISS) द्वारा जारी 150 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पारंपरिक सुरक्षा चिंताओं के मामले में भारत के केंद्र में उसके दो परमाणु-संपन्न पड़ोसी देश- चीन और पाकिस्तान ही बने रहेंगे.

Asia Pacific Security Report : ‘न युद्ध-न शांति’ की खतरनाक हाइब्रिड स्थिति

आईआईएसएस (IISS) की ‘एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय सुरक्षा आकलन’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर बनी “न युद्ध, न शांति” (No War, No Peace) जैसी “हाइब्रिड” स्थिति है. रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत और इन दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों के कारण भारत अब अपनी सेना को बड़े पैमाने पर पारंपरिक युद्ध अभियानों के लिए तैयार कर रहा है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी दिलासा दिया गया है कि भविष्य में यदि कोई “बड़ा पारंपरिक युद्ध” होता है, तो उसके स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहने की अधिक संभावना है.

रिपोर्ट का मुख्य दावा: “चीन के साथ भारत के सीमा संघर्ष अपेक्षाकृत पारंपरिक प्रकृति के रहे हैं. इनके भारत-पाकिस्तान संघर्षों जैसी अत्यंत गंभीर और विनाशकारी स्थिति तक पहुंचने की आशंका बेहद कम है. इसके बावजूद, भारत की चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ सैन्यीकृत सीमाएं लगातार सक्रिय बनी रहेंगी.”

सर्जिकल स्ट्राइक ने बदली भारत की रणनीति

रिपोर्ट में भारत की राजनीतिक और सैन्य इच्छाशक्ति में आए बड़े बदलावों का विशेष रूप से विश्लेषण किया गया है. इसमें कहा गया है कि नई दिल्ली ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के प्रति अपनी “स्वीकार्य सैन्य प्रतिक्रिया” के दायरे को पूरी तरह बदल दिया है. साल 2016, 2019 और हालिया 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ की गईं ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं रहा. ये सर्जिकल स्ट्राइक दर्शाती हैं कि किस तरह जमीनी सैन्य अभियानों की कार्यप्रणाली अब भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक सिद्धांतों को नया आकार दे रही है.

ताइवान विवाद और अमेरिका-चीन संघर्ष से दूरी

सुरक्षा आकलन रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का मुख्य ध्यान अपने निकटतम पड़ोस और हिंद महासागर क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा. भारत के हिंद महासागर क्षेत्र से आगे जाकर व्यापक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कोई बड़ी या सक्रिय सैन्य भूमिका निभाने की संभावना नहीं है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ताइवान को लेकर यदि भविष्य में अमेरिका और चीन के बीच कोई सीधा सैन्य संघर्ष होता है, तो भारत उस विवाद में पड़ने से पूरी तरह बचना चाहेगा.

ग्लोबल टसल: ताइवान पर अमेरिका और चीन की चालें

इस 150 पन्नों के दस्तावेज में केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक महाशक्तियों की रणनीतियों का भी कच्चा चिट्ठा खोला गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका जहां ताइवान की स्थायी रक्षा और उसके लचीलेपन को मजबूत करना चाहता है, वहीं चीन एक ऐसी प्रतिरोधी रणनीति (deterrent strategy) पर काम कर रहा है जिससे अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों को ताइवान जलडमरूमध्य से दूर रखा जा सके.

मलक्का जलडमरूमध्य पर नजर, आक्रामक हुआ चीन

हिंद महासागर क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक केंद्रों, विशेष रूप से ‘मलक्का जलडमरूमध्य’ (Strait of Malacca) को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और द्वीपीय देशों के हितों के नजरिए से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील हो चुका है. इस पूरे क्षेत्र में चीन अपनी सैन्य क्षमता और उपस्थिति को लगातार बढ़ा रहा है, जिससे अन्य देशों के साथ उसकी प्रतिस्पर्धा आक्रामक रूप ले रही है.

गौरतलब है कि 29 से 31 मई तक आयोजित होने वाले वार्षिक ‘शंगरी-ला संवाद’ में दुनिया भर के रक्षा मंत्रियों सहित कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. इस मंच पर आईआईएसएस की यह रिपोर्ट निश्चित रूप से भारत, चीन और अमेरिका के बीच सुरक्षा समीकरणों पर चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु बनने वाली है.

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