नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली की दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने त्वरित जांच और कानूनी कार्रवाई की एक अनूठी मिसाल पेश की है। पुलिस टीम ने चोरी के एक मामले में तत्परता दिखाते हुए वारदात के महज 10 दिनों के भीतर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाकर उसे सजा दिलवा दी है। द्वारका कोर्ट ने भी इस मामले के रिकॉर्ड समय में हुए निपटारे पर दिल्ली पुलिस की जमकर सराहना की। अदालत ने कहा कि आपराधिक मुकदमों का इतनी तेजी से फैसला होना देश की न्याय व्यवस्था में आम जनता के विश्वास को और ज्यादा मजबूत करता है।
पालम विलेज में हुई थी वारदात, 4 घंटे में दबोचा गया चोर
यह पूरा मामला पालम विलेज थाना इलाके का है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 16 मई 2026 को दादा देव रोड स्थित राजनगर पार्ट-2 के एक सूने मकान में चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया था। शातिर चोर घर से करीब 80 हजार रुपये कैश, चांदी की चेन, एक छोटा पर्स और जरूरी दस्तावेज समेटकर रफूचक्कर हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस एक्शन मोड में आ गई। स्थानीय मुखबिरों और चश्मदीदों से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस का शक फहीम नाम के युवक पर गया, जिसे घटना के वक्त घर के पास संदिग्ध हालत में देखा गया था। पुलिस ने घेराबंदी कर वारदात के महज 4 घंटे के भीतर फहीम को धर दबोचा।
नशे की लत के लिए की चोरी; कैश और दस्तावेज बरामद
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपी फहीम से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि वह शराब और नशे का आदी है और अपनी इसी लत को पूरा करने के लिए उसने इस चोरी को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी किए गए 80 हजार रुपये नकद, चांदी जैसी दिखने वाली चेन, पर्स और पीड़ित के पहचान दस्तावेज [Aadhaar Redacted] सहित अन्य कागजात पूरी तरह सुरक्षित बरामद कर लिए।
द्वारका कोर्ट ने की तारीफ, कहा- इससे बढ़ता है न्याय में भरोसा
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बिना वक्त गंवाए मामले की जांच पूरी की और कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किए। द्वारका कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सौरभ गोयल ने मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए 26 मई 2026 को आरोपी फहीम को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी। अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से दर्ज किया कि पुलिस द्वारा इतनी तेजी से मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाना बेहद सराहनीय है, जिससे समाज में एक अच्छा संदेश जाता है।
पुलिस और सरकारी वकीलों के बेहतरीन तालमेल से मिली कामयाबी
इस मामले को रिकॉर्ड समय में सुलझाने का श्रेय पीएसआई निशांत कुमार और हेड कांस्टेबल राजेश की टीम को जाता है। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व पालम विलेज के एसएचओ अनंत धनराज सिंह कर रहे थे, जबकि पूरे मामले की निगरानी एसीपी अनिल कुमार द्वारा की जा रही थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सटीक समय पर चार्जशीट दाखिल करने, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और अदालत में अभियोजन पक्ष (सरकारी वकीलों) के एपीपी सुधांशु सैनी व विकास खरब द्वारा की गई दमदार पैरवी के कारण ही महज 10 दिनों में दोषी को सजा मिलना मुमकिन हो पाया।

