छत्तीसगढ़ की पर्वतारोही ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर रचा इतिहास

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की होनहार बेटी अमिता श्रीवास ने विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर एक नया इतिहास रच दिया है। प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर के पद पर सेवाएं दे रहीं अमिता ने इस अत्यंत दुर्गम अभियान को पूरा कर वैश्विक पटल पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।

एवरेस्ट के शिखर पर लहराया भारत का मान

अमिता श्रीवास ने बीती 22 मई 2026 को समुद्र तल से 8,848.86 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा और वहां देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उनकी इस अद्भुत और ऐतिहासिक कामयाबी से चांपा शहर समेत पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में हर्ष और गर्व की लहर दौड़ गई है। लोग अमिता की इस अदम्य सफलता को महिला सशक्तिकरण, कड़े संघर्ष और बुलंद हौसलों की एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

वापसी के दौरान बिगड़ी सेहत, काठमांडू में इलाज जारी

पर्वत के शिखर को फतह करने के बाद जब अमिता नीचे उतर रही थीं, तब अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से 40 डिग्री नीचे (-40°C) के हाड़ कपाने वाले तापमान और ऑक्सीजन के बेहद कम स्तर के चलते उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें फौरन हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया और नेपाल की राजधानी काठमांडू के नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अमिता 'फ्रॉस्टबाइट' (बर्फ के कारण अंगों का सुन्न होना) और 'हाई एल्टीट्यूड सिकनेस' (अत्यधिक ऊंचाई से होने वाली बीमारी) से जूझ रही हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताई खुशी, शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अमिता श्रीवास के इस साहसिक कीर्तिमान की सराहना करते हुए उनके जल्द से जल्द पूरी तरह ठीक होने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अमले को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि अमिता के बेहतर इलाज और सहायता के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि अमिता का अटूट साहस, समर्पण और जज्बा प्रदेश के युवा वर्ग के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा। देश और प्रदेश को अपनी इस बहादुर बेटी की उपलब्धि पर बेहद नाज है।

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