अंबिकापुर में वन विभाग पर गड़बड़ी के आरोप, ग्रामीणों ने मांगा लाखों के भुगतान का हिसाब

सरगुजा |  छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंतर्गत आने वाले धौरपुर वन परिक्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों और जमीनी अमले की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन्य हाथियों के प्रकोप से प्रभावित हुए स्थानीय ग्रामीणों को कई साल बीत जाने के बाद भी अब तक उचित हर्जाना (मुआवजा) नहीं मिल सका है। कई पीड़ित परिवारों का आरोप है कि वन विभाग ने उनके नुकसान का जो मूल्यांकन किया है, वह बेहद कम है और उन्हें नाममात्र की राशि थमाई जा रही है। इस प्रशासनिक उदासीनता से त्रस्त होकर प्रभावित ग्रामीणों ने 'सुशासन तिहार' कार्यक्रम में औपचारिक आवेदन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई है।इसके साथ ही, ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र में विभाग द्वारा कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। लोगों ने सूचना के अधिकार के तहत इन कार्यों का पूरा ब्यौरा और भुगतान की जानकारी मांगी है, जिसके बाद से संबंधित महकमे में खलबली मच गई है।

हाथी प्रभावितों को मुआवजे का इंतजार और सुशासन तिहार में शिकायत

धौरपुर वन क्षेत्र में हाथियों के हमले और उत्पात से प्रभावित हुए दर्जनों परिवार पिछले कई वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पीड़ितों का कहना है कि वन अमले की लापरवाही के कारण या तो उनका मुआवजा अटका हुआ है, या फिर जिन लोगों की फाइलें आगे बढ़ी हैं, उन्हें नुकसान के एवज में बेहद मामूली राशि दी गई है। इस समस्या के स्थायी समाधान और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर सुशासन तिहार मंच का दरवाजा खटखटाया है।

चेक डैम और पौधारोपण कार्यों में घटिया निर्माण व फर्जी भुगतान का आरोप

स्थानीय निवासियों के अनुसार, धौरपुर क्षेत्र की पडोली और किशनपुर ग्राम पंचायतों में पिछले दो वर्षों के दौरान वन विभाग ने लाखों रुपये के बजट से कई विकास कार्य स्वीकृत किए थे। इनमें वनों के भीतर चेक डैम (तटबंध) का निर्माण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण (प्लांटेशन) शामिल थे। आरोप है कि ये सभी निर्माण कार्य अत्यंत निम्न स्तर के हैं और पहली बारिश में ही इनके ढहने की आशंका है। इसके अलावा, मजदूरी के भुगतान में भी बड़ा खेल हुआ है; जिन वास्तविक मजदूरों ने कड़ा परिश्रम किया, उन्हें पैसे देने के बजाय ऐसे रसूखदार लोगों के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी गई, जो कभी काम पर गए ही नहीं थे।

लाखों के घोटाले की आशंका से वन अमले में हड़कंप, मुख्यमंत्री से होगी शिकायत

ग्रामीणों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि यदि इन सभी निर्माण कार्यों और मजदूरी भुगतान की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो लाखों रुपये का सरकारी गबन उजागर होगा। सुशासन तिहार में वित्तीय विवरण और भुगतानों की सूची संबंधी आवेदन जमा होने के बाद से ही दोषी अधिकारी और कर्मचारी सहमे हुए हैं। क्षेत्र के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय स्तर पर इस मामले की सही जांच नहीं हुई, तो वे इसकी सीधी शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे और मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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