वर्षों सेवा के बाद भी नहीं मिली स्थायी नौकरी, सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण पर दिया बड़ा निर्देश

नई दिल्ली | कर्मचारियों के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि किसी भी कर्मचारी को सिर्फ इस आधार पर पक्की नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी शुरुआती नियुक्ति अस्थायी तौर पर या किसी स्वीकृत पद पर नहीं हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी सरकारी विभागों में लंबे समय से लगातार और नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहा है, तो सरकार को उसे नियमित करने (पक्का करने) पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

गौहाटी हाईकोर्ट का फैसला पलटा, मस्टर रोल कर्मचारियों को राहत

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले में गौहाटी हाईकोर्ट के पुराने फैसले को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस कदम से असम सरकार के विभिन्न विभागों में मस्टर रोल (दैनिक वेतनभोगी) पर सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को बहुत बड़ी राहत मिली है। इससे पहले राज्य सरकार ने यह दलील देते हुए इन कर्मचारियों को पक्का करने से मना कर दिया था कि जब इन्हें काम पर रखा गया था, तब वे पद स्वीकृत नहीं थे। हालांकि, शीर्ष अदालत ने सरकार की इस दलील को पूरी तरह अमान्य करार दिया।

एक जैसे कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया गलत

सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में असम सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने खुद एक कैबिनेट नीति तैयार करके लगभग 30 हजार समान योग्यता और स्थिति वाले कर्मचारियों को नियमित किया था। ऐसे में कुछ बचे हुए कर्मचारियों को इस लाभ से दूर रखना पूरी तरह गलत और भेदभावपूर्ण है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार एक जैसी परिस्थिति वाले कर्मचारियों के बीच दोहरा पैमाना नहीं अपना सकती और समान काम के लिए समान अधिकार मिलना ही चाहिए।

संविधान की मूल भावना और निष्पक्षता का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि कोई भी सरकारी विभाग लंबे समय तक कर्मचारियों से पक्का काम करवाकर उन्हें अस्थायी दर्जे में नहीं रख सकता। यह व्यवस्था पूरी तरह अनुचित है। पीठ ने याद दिलाया कि निष्पक्षता, समानता और न्याय हमारे संविधान की मूल आत्मा हैं, इसलिए सरकार का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपनी नीतियों और फैसलों में इसी संवैधानिक भावना का पालन करे।

Latest news

Related news