भोजशाला मंदिर में किस देवी की पूजा होती है? वाग्देवी का क्या है अर्थ

मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला मामले पर बड़ा अपडेट सामने आया है, जहां आज 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने माना है कि भोजशाला एक वाग्देवी मंदिर है. भोजशाला में ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां वाग्देवी की पूजा होती है. हिंदू समुदाय इसे राजा भोज द्वारा स्थापित मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जहां बसंत पंचमी के दिन विशेष पूजा की जाती है. हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का यह प्रमुख त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ देश भर में मनाया जाता है.
अभी तक जहां 1100 साल पुराने भोजशाला के इस मेंदिर को हिंदू पक्ष के लोग वाग्देवी का मंदिर मानते आएं हैं वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग इसे कमाल मौलाना मस्जिद होने का दावा करता था. आइए जानते हैं क्या है वाग्देवी का अर्थ.
वाग्देवी का अर्थ:वाग्देवी दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘वाक्’ (वाणी या शब्द) + देवी.

वाग्देवी कौन हैं?
वाग्देवी शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘वाणी की देवी’ होता है. इन्हें देवी सरस्वती का ही स्वरूप माना गया है, जो ज्ञान, संगीत, कला और अभिव्यक्ति की अधिष्ठात्री हैं. शास्त्रों में उनका वर्णन अत्यंत दिव्य रूप में मिलता है, जहां वे श्वेत वस्त्र धारण किए हुए और कमल पर विराजमान दिखाई जाती हैं. उनका स्वरूप शांति और सृजन का प्रतीक माना जाता है, जो मनुष्य के भीतर ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करता है. अनेक पुराणों में उन्हें ब्रह्मस्वरूपा कहा गया है और उनकी चार भुजाओं वाला स्वरूप ज्ञान की चार दिशाओं का प्रतीक माना जाता है.

अन्य नाम: इन्हें सरस्वती, शारदा, भारती, वागीश्वरी आदि नामों से भी जाना जाता है.
महत्व: वाग्देवी को समस्त कलाओं, संगीत, साहित्य, विद्या और बुद्धि की जननी माना जाता है.
पूजा: बसंत पंचमी का दिन मुख्य रूप से मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है.
मंत्र: इनकी उपासना के लिए “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप किया जाता है.

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