धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट ने माना ‘मंदिर’, मुस्लिम पक्ष जायेगा सुप्रीम कोर्ट

Dhar Bhojshala Dispute : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे दशकों पुराने विवाद में एक बड़ा फैसला आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को ‘मंदिर’ माना है. इस फैसले के बाद हिंदू पक्ष में खुशी की लहर है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस निर्णय को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बना लिया है.

Dhar Bhojshala Dispute : हाई कोर्ट ने क्या कहा ?

हाई कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान एएसआई द्वारा सौंपी गई 2000 पन्नों से अधिक की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाया. कोर्ट के फैसले के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

  • ऐतिहासिक साक्ष्य: कोर्ट ने माना कि विवादित परिसर के भीतर मौजूद खंभों, नक्काशी और शिलालेखों पर मिले चिह्न स्पष्ट रूप से सनातन धर्म और वाग्देवी (मां सरस्वती) के मंदिर होने का प्रमाण देते हैं.

  • ASI सर्वे की भूमिका: हाल ही में हुए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) और वैज्ञानिक उत्खनन में मंदिर के अवशेष मिलने की पुष्टि हुई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया.

  • पूजा का अधिकार: फैसले के बाद हिंदू पक्ष का दावा है कि अब वहां नियमित पूजा-अर्चना का मार्ग प्रशस्त होगा.

मुस्लिम पक्ष का रुख: सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी

हाई कोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी (मुस्लिम पक्ष) ने इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है. मुस्लिम पक्ष की दलील –

  1. प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट (1991): मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि यह फैसला 1991 के ‘पूजा स्थल अधिनियम’ का उल्लंघन करता है, जो 15 अगस्त 1947 वाली धार्मिक स्थिति को बनाए रखने की बात करता है.

  2. मस्जिद का दावा: उनका कहना है कि यह सदियों पुरानी मस्जिद है और एएसआई की रिपोर्ट को पक्षपाती बताते हुए वे सुप्रीम कोर्ट से स्टे (स्थगन) की मांग करेंगे.

क्या है भोजशाला विवाद? (इतिहास एक नजर में)

भोजशाला विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें राजा भोज के काल तक जाती हैं:

विवरण जानकारी
मूल स्वरूप 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा निर्मित संस्कृत पाठशाला और मां सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर।
मुस्लिम पक्ष का दावा यह कमाल मौला की दरगाह और मस्जिद है।
विवाद का केंद्र हिंदू पक्ष इसे मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद।
ASI का 2003 का आदेश इसके तहत हिंदू मंगलवार को पूजा करते थे और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा करते थे।

अब आगे क्या होगा?

इस फैसले का असर न केवल धार बल्कि पूरे देश की राजनीति और धार्मिक विमर्श पर पड़ना तय है.

  • कानूनी प्रक्रिया: अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं. यदि सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाता, तो भोजशाला में हिंदू पक्ष की गतिविधियां बढ़ सकती है.

  • सुरक्षा व्यवस्था: फैसले को देखते हुए धार प्रशासन ने जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे.

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