NEET पेपर लीक का बड़ा खुलासा: RJD नेता समेत 4 गिरफ्तार

नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में धांधली करने और एमबीबीएस की सीट दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है, जिसमें कथित मास्टरमाइंड और एक डॉक्टर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

नीट परीक्षा से ठीक पहले बड़े गिरोह का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई करते हुए नीट अभ्यर्थियों के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना संतोष कुमार जायसवाल और उसके तीन अन्य साथियों को दबोच लिया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह छात्रों और उनके अभिभावकों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का लालच देकर अपना शिकार बनाता था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गाजियाबाद और दिल्ली के विभिन्न इलाकों से करीब 18 छात्रों को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया है, जिन्हें कथित तौर पर प्रश्न पत्र मुहैया कराने के बहाने अज्ञात स्थानों पर रखा गया था।

फर्जी प्रश्न पत्र और वसूली का काला कारोबार

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों और विभिन्न कोचिंग संस्थानों के नोट्स को मिलाकर एक फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करते थे ताकि छात्रों को गुमराह किया जा सके। इस काम के लिए गिरोह के सदस्य प्रत्येक परिवार से 20 से 30 लाख रुपये की मोटी रकम मांगते थे और गारंटी के तौर पर उनसे 10वीं व 12वीं की मूल मार्कशीट के साथ-साथ हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक भी ले लेते थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान प्रश्न-उत्तर सामग्री के लगभग 149 पन्ने और कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए हैं जो आरोपियों की संलिप्तता को पुख्ता करते हैं।

संगठित तरीके से अंजाम दी जाती थी ठगी

पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का प्रत्येक सदस्य एक निर्धारित भूमिका निभाता था ताकि पूरा नेटवर्क बिना किसी बाधा के संचालित हो सके। मास्टरमाइंड संतोष जायसवाल जहां पूरी साजिश का मुख्य संचालक था, वहीं गिरफ्तार किया गया डॉक्टर अखलाक आलम कथित फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करने का विशेषज्ञ था। गिरोह के अन्य सदस्य जैसे संत प्रताप सिंह छात्रों के ठहरने और आवास की व्यवस्था देखता था, जबकि विनोद भाई पटेल का काम गुजरात जैसे राज्यों से जरूरतमंद परिवारों को ढूंढकर उन्हें गिरोह के जाल में फंसाना था।

सूरत पुलिस की सूचना और सफल पुलिसिया कार्रवाई

इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत सूरत पुलिस से मिली एक गोपनीय जानकारी के बाद हुई, जिसमें दिल्ली के महिपालपुर इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की बात कही गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने होटलों और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गाजियाबाद के एक फ्लैट तक पहुंची। पुलिस ने सभी बरामद छात्रों को काउंसलिंग के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। फिलहाल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश जारी है।

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