Manish Sisodiya : दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शराब नीति मामले में एक बड़ा कदम उठाया है.अरविंद केजरीवाल के बाद अब सिसोदिया ने भी दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर कानूनी कार्यवाही से खुद को अलग करने और ‘सत्याग्रह’ की राह पर चलने की बात कही है.
Manish Sisodiya- ‘न्याय की उम्मीद नहीं, अब सिर्फ सत्याग्रह का रास्ता’
मनीष सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में स्पष्ट रूप से कहा है कि अब उनकी तरफ से अदालत में कोई वकील पेश नहीं होगा. सिसोदिया ने पत्र में लिखा, “मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथ में है. ऐसे में, मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है.” उन्होंने आगे भावुक होते हुए लिखा कि उनके पास अब ‘सत्याग्रह’ के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है.
“I have no hope of justice,” says AAP leader Manish Sisodia in his letter to Justice Swarana Kanta Sharma, stating that no lawyer will appear before her on his behalf.
“There is no way left except Satyagraha,” Sisodia adds, after AAP National convenor Arvind Kejriwal boycotted… pic.twitter.com/53tY63EHnL— ANI (@ANI) April 28, 2026
केजरीवाल ने भी तोड़ा था कानूनी नाता
सिसोदिया से पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को इसी तरह का पत्र लिखा था. केजरीवाल ने कहा था कि उनकी न्याय मिलने की उम्मीद टूट चुकी है और वे अपनी अंतरात्मा की आवाज पर महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करेंगे. केजरीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का पूरा अधिकार है.
जस्टिस शर्मा को हटाने की मांग
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब केजरीवाल ने मांग की कि वह कार्यवाही में तभी शामिल होंगे जब इस मामले की सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाया जाएगा. सिसोदिया के इस ताज़ा फैसले ने अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है.
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क्या है दिल्ली शराब नीति मामला?
यह विवाद दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़ा है, जिसमें अनियमितताओं और कुछ शराब कारोबारियों को लाभ पहुँचाने के आरोप लगे थे। सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) इसकी जांच कर रही हैं। हालांकि, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अभी सुनवाई चल रही है।

