Wednesday, July 8, 2026
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बिहार के आलू किसान दाम ना मिलने से मायूस, सड़कों पर अपनी फसल फेंकने के लिए हुए मजबूर

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bihar potato
farmer throwing potato on road

एस समय था जब बिहार में ये कहावत थी कि जब तक रहेगा समोसे में आलू  तब तक रहेगा बिहार में लालू.. अब बिहार में लालू तो हैं लेकिन आलू की हालत खराब है….या यूं कहिये की आलू उगाने वाले किसानों की हालत खराब है. किसानों हर साल भगवान से बंपर पैदावार की दुआएं मांगते हैं, लेकिन अगर पैदावार अच्छी हो जाती है तब भी ये कई बार किसानों के लिए मुसीबत बन जाती है. यकीन ना हो तो ये देखिये….

ये दृश्य है बेगुसराय के बछवाड़ा प्रखंड के रानी पंचायत से गुजर रहे नेशनल हाइवे का. यहां किसान अपने खेतों में उगाये आलू को सड़कों पर फेंक रहे हैं और उसे कुचलते हुए बसें आगे बढ़ रही हैं.

 NH 28 पर आलू किसान का प्रदर्शन

दरअसल बेगुसराय के ये किसान पिछले दो दिन से अपनी फसल के साथ नेशनल हाइवे पर प्रदर्शन कर रहे हैं.किसानों का कहना है कि उनकी फसल कोई औने पौने दाम में भी खरीदने के लिए तैयार नहीं है.  दिल्ली जैसे महानगरों में जहां आलू 10 से लेकर 15 रुपये किलो तक बिक रहा है वहीं बिहार में इनकी फसल कोई 4 रुपये किलो भी खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है.इसलिए उनके पास इसे सड़कों पर फेंकन के अलावा कोई विकल्प नहीं है

किसानों कहना है कि उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं, कोल्ड स्टोरेज में फसल रखने के लिए जगह नहीं है, इसलिए मजबूरन उन्हें अपनी फसल इस तरह से सड़कों पर फेंकनी पड़ रही है. किसान सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार की तरफ से ना कोई मदद मिल रही है ना ही कोल्ड स्टोरेज में उन्हें रखने की जगह.

केरल की तरह बिहार में भी तय हो हरी साग सब्जियों पर MSP

किसानों की मांग है कि बिहार में भी केरल की तरह हरी साग-सब्जियों की न्यूनतम समर्थन मूल्य तय की जाये . एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है वहीं हमें अपने लागत का आधा भी नहीं  मिल रहा है.

सरकारी रवैये से परेशान किसान अब ये कह रहे हैं कि अगर यही हालत रही तो अगले साल से किसान अपने खेतों को खाली रखना पसंद करेंगे लेकिन आलू की पैदावार नहीं करेंगे.