Trump’s Dangerous Plan : वॉशिंगटन/तेहरान: दुनिया को उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब देश को संबोधित करने आएंगे, तो शायद युद्ध विराम या शांति का कोई रास्ता निकलेगा लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट. ट्रंप ने अपनी 20 मिनट की स्पीच में अगले 20 दिनों का ऐसा ‘वॉर प्लान’ पेश किया, जिसने मिडिल ईस्ट समेत पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
ट्रंप ने खहा कि ईरान के साथ किसी भी डील की जरूरत नहीं है और अमेरिका अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगले दो-तीन हफ्ते यह तय करेंगे कि ईरान के खिलाफ अमेरिका कितना बड़ा कदम उठाने जा रहा है.
Trump’s Dangerous Plan :ड्रोन बनाम 2000 पाउंड के ‘बंकर बस्टर’ बम
ट्रंप के इस आक्रामक रुख के तुरंत बाद ईरान ने इजरायल पर ड्रोन दागकर अपने इरादे जता दिए हैं। अब यह युद्ध एक नए फेज में प्रवेश कर चुका है, जिसे एक्सपर्ट्स ‘ड्रोन वॉर 2.0’ कह रहे हैं. एक तरफ ईरान के आधुनिक और घातक ड्रोन्स हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका के 2000 पाउंड के हेवी बंकर बस्टर बम.
युद्ध के इस नए चरण की बड़ी बातें:
-
स्मार्ट बमिंग: अमेरिका और इजरायल अब ‘स्मार्ट बमिंग’ के जरिए ईरान के उन ठिकानों को निशाना बना सकते हैं जो जमीन के काफी नीचे छिपे हैं.
-
एआई-आधारित हमले: आने वाले दिनों में लो-फ्लाइंग स्टेल्थ ड्रोन और एक साथ कई ड्रोन्स के ‘स्वार्म अटैक’ (Swarm Attack) देखने को मिल सकते हैं।
-
सटीक तबाही: अमेरिका अपने GBU-31 JDAM और GBU-24 Paveway III जैसे हथियारों का इस्तेमाल बढ़ा सकता है, जो हर मौसम में सटीक निशाना लगाने और बंकरों को भेदने में माहिर हैं.
ईरान का पलटवार: सिर्फ ड्रोन नहीं, मिसाइलें भी तैयार
अगर अमेरिका और इजरायल अपनी आक्रामकता बढ़ाते हैं, तो ईरान भी चुप नहीं बैठेगा. ईरान के पास अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है, जिसमें कुछ खास हैं…
-
शाहब-3: लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल.
-
फतेह-110: घातक शॉर्ट-रेंज मिसाइल.
-
खोर्रमशहर: मीडियम-रेंज मिसाइल.
ईरान ने धमकी दी है कि वह अमेरिकी बेस और बड़ी कंपनियों को निशाना बना सकता है, जो इस संघर्ष को एक ‘ओपन वॉर’ में बदल सकता है.
क्या कई मोर्चों पर घिर जाएगा इजरायल?
ट्रंप की रणनीति के बाद ईरान अपने ‘प्रॉक्सी’ संगठनों को एक्टिव कर सकता है.
-
लेबनान से हिजबुल्लाह के हमले तेज हो सकते हैं.
-
रेड सी में हूती विद्रोही व्यापारिक जहाजों को निशाना बना सकते हैं.
-
गाजा में हमास नए सिरे से मोर्चा खोल सकता है। ऐसे में इजरायल को एक साथ कई फ्रंट पर अपनी ताकत झोंकनी पड़ सकती है।
डायरेक्ट वॉर या प्रॉक्सी वॉर?
इतनी तनातनी के बावजूद, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही सीधे आमने-सामने की जंग से बचना चाहते हैं, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महंगा साबित होगा. संभावना यही है कि अमेरिका सीमित एयरस्ट्राइक और नौसैनिक मौजूदगी के जरिए दबाव बनाए रखेगा, जबकि जमीन पर यह जंग ‘प्रॉक्सी वॉर’ के रूप में ही जारी रहेगी. हालांकि, ट्रंप के “अगले 20 दिन” वाले बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शांति फिलहाल कोसों दूर है.

