इजराइल की ‘रोबोटिक फौज’:कतर के होटलों में मिले जासूसी कीड़े, मिडिल ईस्ट में हड़कंप

Israel Robotic Insectsदोहा/यरूशलेम: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है. दावा किया जा रहा है कि इजराइल ने दुश्मन देशों की जासूसी के लिए ‘रोबोटिक कीड़ों’ (Robotic Insects) की एक फौज तैनात की है. कतर मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये नैनो-रोबोट्स उन महत्वपूर्ण ठिकानों और होटलों में पाए गए हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय राजनयिक और सरकारी अधिकारी ठहरते हैं.

Israel Robotic Insects:क्या है नैनो-रोबोटिक्स तकनीक?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे जासूसी नेटवर्क को पकड़ा है जो इजराइल के लिए काम कर रहा था. इस नेटवर्क की सबसे खास बात जासूसी के लिए इंसानों का नहीं, बल्कि ‘इन्सेक्टोथॉप्टर्स’ (Insectothopters) या बायो-इंस्पायर्ड ड्रोन्स का इस्तेमाल करना है. ये रोबोट देखने में हूबहू आम मक्खी या मच्छर जैसे लगते हैं, जिससे इन्हें पहचानना नामुमकिन हो जाता है।

रोबोटिक कीड़ों की बड़ी विशेषताएं 

  • अदृश्य आकार: ये इतने सूक्ष्म हैं कि नग्न आंखों से सामान्य कीड़ों और इनमें फर्क करना कठिन है.

  • हाई-टेक सेंसर: इनमें माइक्रो-कैमरे और सेंसिटिव माइक्रोफोन लगे हैं जो दबे पांव हर हलचल रिकॉर्ड करते हैं.

  • पहुंच: ये रोबोट दीवारों पर चिपक सकते हैं और एयर कंडीशनिंग डक्ट्स या कमरों की बारीक दरारों से अंदर दाखिल हो सकते हैं.

  • लाइव डेटा: ये रियल-टाइम में बातचीत और वीडियो सीधे ऑपरेटर तक पहुंचा सकते हैं.

VVIP होटल और कूटनीति पर निशाना

बताया जा रहा है कि इन रोबोट्स को कतर के उन होटलों में तैनात किया गया था जहाँ अक्सर हमास, इजराइल और अन्य देशों के बीच मध्यस्थता की बातचीत होती है. इन हाई-प्रोफाइल मीटिंग्स की रणनीतिक जानकारी जुटाने के लिए इस हाई-टेक जासूसी का सहारा लिया गया.

इजराइल का जासूसी इतिहास

इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) हमेशा से अपनी उन्नत तकनीक के लिए चर्चा में रही है. इससे पहले भी ‘पेगासस’ स्पाइवेयर के जरिए दुनिया भर में फोन टैपिंग के आरोपों ने सुर्खियां बटोरी थीं. अब इन ‘इलेक्ट्रॉनिक कीड़ों’ ने जासूसी की दुनिया में  नए युग की आहट दे दी है.

सावधानी और पुष्टि

इस खुलासे के बाद कतर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक कड़ा कर दिया है. हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि फिलहाल यह जानकारी सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए वायरल हो रही है. कतर सरकार या किसी अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीय एजेंसी ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

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