FakeBirthdayofBJPMP : बीजेपी एमपी सतनाम सिंह संधू इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अजीब विवाद का केंद्र बन गए हैं. दावा किया जा रहा है कि वे साल में दो बार जन्मदिन मनाते हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन क्या यह दावा सच है या सिर्फ एक वायरल भ्रम?
सांसद हैं तो दो बार जन्मदिन मनाना तो बनता है, पता नहीं क्यो लोग पीछे पड़े हैं #FakeBirthdayofBJPMP #DieselPrice #Chiraiya #booknow https://t.co/6wasqRfr8p pic.twitter.com/CQctPI4H2W
— पीडीए भारत (@PDABharat) March 20, 2026
FakeBirthdayofBJPMP: कौन हैं सतनाम सिंह संधू?
सतनाम सिंह संधू शिक्षा क्षेत्र का एक बड़ा नाम हैं. वे चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के संस्थापक चांसलर हैं और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी हैं. उनका जन्म पंजाब के फिरोजपुर जिले के रसूलपुर गांव में हुआ है.उन्हें जनवरी 2024 में राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया था.
क्या है जन्मतिथि का असली सच?
आधिकारिक रिकॉर्ड यानी जैसे राज्यसभा प्रोफाइल और विकिपीडिया के अनुसार सतनाम सिंह संधू की जन्मतिथि 11 सितंबर 1969 है. हर साल इसी दिन देश के कई बड़े नेता और उनके समर्थक उन्हें बधाई देते हैं.
In politics, honesty is power
Not manufactured narratives
People want real leaders#FakeBirthdayofBJPMP pic.twitter.com/73RIuZ4eQK— Raj Singh (@RajSingh1069467) March 20, 2026
…फिर विवाद क्यों हुआ?
मार्च 2026 में सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट सामने आये, जिनमें 17 मार्च को उन्हें जन्मदिन की बधाई दी गई. इसके बाद कुछ हैंडल्स जैसे @BoltaHindustan और @thelucknow360 ने इस पर सवाल उठाए और इसे मुद्दा बना दिया. सोशल मीडिया पर #FakeBirthdayofBJPMP जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे. कुछ यूज़र्स ने आरोप लगाया कि वे “दो-दो बार” जन्मदिन मनाते हैं. वहीं कुछ यूट्यूब चैनलों ने इसे “क्रेडिबिलिटी” का मुद्दा बताया.
#FakeBirthdayofBJPMP
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाना यूपी में तो जघन्य अपराध है?? यह व्यक्ति विपक्ष में होता तो जेल में रहता, सांसदी भी जाती, जुर्माना भी लगाया जाता! आजम खान के पूरे परिवार को जेल हुई थी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र केस में!रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान,… https://t.co/Ab4GlbgzoN
— Raja Pal (@Rraja_pal) March 20, 2026
विवाद की असली वजह क्या हो सकती है?
शिक्षा जगत के एक सम्मनित व्यक्ति के लिए इस तरह का ट्रोल अपमानजनक माना जा सकता है . ऐसे में ये संभावना जताी जा रही है कि मार्च में आई बधाई पोस्ट्स संभवतः गलती, टाइपो या गलतफहमी का परिणाम थीं लकेिन कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक या व्यक्तिगत हमला बनाने की कोशिश की. इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं है कि सतनाम सिंह संधू ने खुद दो अलग-अलग जन्मतिथियों का दावा किया हो. अधिकांश आधिकारिक रिकॉर्ड और बधाइयाँ सिर्फ 11 सितंबर को ही दर्शाती हैं.
सोशल मीडिया पर सतनाम सिंह संधू को लेकर खूब बहस चल रही है, लेकिन फिलहाल ये मामला केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित है. इस मामले की अब तक कोई आधिकारिक जांच नहीं हुई है ना ही संधू या उनकी टीम की तरफ से कोई सफाई सामने आई है .जानकार इसे “वायरल ट्रोल” या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया विवाद मान रहे हैं. जानकारों के मुताबिक ये विवाद फिलहाल तथ्यों से ज्यादा सोशल मीडिया की अटकलों पर आधारित दिखता है. आधिकारिक दस्तावेज़ 11 सितंबर को ही उनकी जन्मतिथि बताते हैं, जबकि मार्च की पोस्ट्स संभवतः भ्रम या ट्रोलिंग का हिस्सा हैं.
नोट :- य़े खबर सोशल मीडिया से मिली खबरों पर आधारित है. ‘द भारतनाउ’ मीडिया इस खबर की पुष्टि नहीं करता है.

