अंतिम ग्यारह से बाहर होने से हताश था : सैमसन

नई दिल्ली। टी20 विश्वकप में शानदार प्रदर्शन कर प्लेयर ऑफ द टूर्नोमेंट रहे बल्लेबाज संजू सैमसन ने कहा है कि वह शुरुआती दौर में टीम में जगह नहीं मिलने से हताश थे। सैमसन ने कहा कि उन्होंने तय किया था कि अवसर मिलने पर टीम की जरुरत के हिसाब से खेलेंगे। उसी कारण वह सफल रहे। इसी से उन्हें अंतिम ग्याह में जगह बनाने में भी सहायता मिली। इस बल्लेबाज ने कहा, ‘मैं अपने के लिए अच्छा प्रदर्शन करने की जगह पर दूसरों के लिए अच्छा करना पसंद करता हूं। मैं टीम में जगह बनाने के लिए अपने ही साथियों से मुकाबला करना चाहता था जो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।’ 
उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत बेचैन था क्योंकि मुझे पता था कि मेरा सपना अब बहुत करीब है। परन्तु टीम अलग-अलग संयोजन आजमा रही थी, जिससे मुझे जगह मिलेगी या नहीं जैसी बातें मेरे दिमाग में थीं। ’ संजू ने कहा, ‘मैं पूरी तरह टूट गया था क्योंकि मेरा सपना विश्व कप जीतना था पर मैं अंतिम ग्यार में जगह नहीं बना पाया था।  इसलिए मैं पांच-छह दिन सबसे दूर चला गया और अपने को फिर से संभालना शुरू किया।’
उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने को तैयार करना शुरू कर दिया था, ये जानते हुए कि खेलने का अवसर मिलने की संभावना काफी कम है।’ उन्हें जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर आठ मैच में मिला उसमें वह हालांकि अधिक रन नहीं बना पाये पर प्रबंधन ने उन्हें टीम में बनाये रखा। सैमसन ने कहा, ‘मुझे पता था कि टीम मैनेजमेंट को मुझ पर भरोसा है। जिम्बाब्वे मैच से ही, हमें चार में से चार मैच जीतने थे और टीम को मेरी जरूरत थी. तभी से मेरे लिए चीजें सही दिशा में हो गईं और मैं उत्साहित हो गया।’ इस बल्लेबाज ने कहा, ‘जिस दिन से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, मेरा एक ही सपना था कि देश के लिए खेलूं जिसमें सफल रहा। साथ ही कहा कि  जब आप देश के लिए खेलते हैं तो सबसे बड़ा सपना अपने देश के लिए आईसीसी ट्रॉफी जीतना होता है।’
उन्होंने कहा, ‘शुरुआत वैसी नहीं थी जैसी मैं चाहता था, लेकिन फिर भी मैं खुश था क्योंकि टीम अच्छा कर रही थी और हम मैच जीत रहे थे।’ उन्होंने कहा, ‘मेरा सपना था कि मैं एक दिन विश्व चैंपियन बनूं। ये सिर्फ एक ट्रॉफी की बात नहीं है, बल्कि ये इस बात पर है कि मैं अपने देश के लिए कितनी ट्रॉफी जीत सकता हूं। मैं इसी सोच के साथ खेलता हूं।’ 

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