Tuesday, March 10, 2026

अमेरिका ईरान की लड़ाई में क्यों सबसे बड़े विजेता बनकर उभर रहे हैं रुसी राष्ट्रपति पुतिन ?

Trump-Iran War Putin Winner : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के हमलों ने पूरी दुनिया के  तेल बाजारों को झकझोर कतर रख दिया है. तेल के दाम आसमान की तऱफ भाग रहे हैं. तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के कारण विश्व की अर्थव्सवस्था में  रूस के लिए एक नई आर्थिक राहत की स्थिति बनती दिखाई दे रही है.

विश्व बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से रुस का फायदा 

दरअसल रूस की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात यानी तेल के निर्यात पर निर्भर करता है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो मॉस्को की कमाई बढ़ने की पूरी संभावना है. यूक्रेन के साथ पिछले चार साल से चल रहे युद्ध  और अपने उपर लगे प्रतिबंधों के कारण पिछले पिछले कुछ महीनों से रूस की सरकार और सेंट्रल बैंक इस बात पर विचार कर रहे थे कि आखिर पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण हो रहे आर्थिक नुकसान को कैसे कम किया जाए ? क्योंकि  यूक्रेन के साझ युद्ध शुरु होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर  ऊर्जा व्यापार के लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं.

रुस को कमजोर करने का ट्रंप की कोशिश नाकाम 

 बीते कुछ सालों और महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति की डोनाल्ड ट्रंप (Donaland Trump) की कोशिश रही है कि रूस की “वॉर मशीन” कही जाने वाली ऊर्जा आय को कमजोर किया जाए. इसी रणनीति के तहत वॉशिंगटन ने रूस के तेल व्यापार को सीमित करने के लिए कदम उठाए और उसके बड़े खरीदार देशों जैसे भारत और चीन पर हाई टैरिफ लगाकर दबाव भी बनाया.

 अमेरिका ने भारत के से एक्सपोर्ट होने वाले सामानों पर  भारी टैरिफ लगाया साथ ही रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगा दिये.  शुरुआत में तो इन दवाबों का असर रूस की आय पर पड़ता हुआ दिख भी दिया लेकिन ईरान पर हमलों के बाद स्थिति बदल एकदम बदल गई है.  मिडिल-इस्ट से तेल आपूर्ति बाधित होने के बाद जिस तरह से पूरी दुनिया में तेल के दाम बढें हैं, उसका सीधा फायदा रुस को मिलने जा रहा है.

युद्ध के बीच अमेरिका ने दी अस्थाई छूट 

इसी कड़ी में देखा जाये तो अमेरिका ने ईरान को तबाह करने के लिए जो हमला किया है,उसने रुस के लिए नये अवसर दिये हैं. पिछले सप्ताह अमेरिका ने भारतीय रिफाइनर कंपनियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट भी दी. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह फैसला वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई को बनाए रखने के लिए लिया गया है. अंतराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है.

रूस ने अपने 2026 के बजट में यूराल्स क्रूड की औसत कीमत करीब 59 डॉलर प्रति बैरल मानकर योजना बनाई थी लेकिन पश्चिमी देशों के द्वारा लगाये गये प्रतिबंधों, ऊंची ब्याज दरों और श्रम की कमी के कारण इस साल की शुरुआत में रूस की ऊर्जा आय 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी. ऐसे में तेल कीमतों में मौजूदा उछाल क्रेमलिन के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है और इससे रूस की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सकती है. ईरान – अमेरिका युद्ध में इस समय रुसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन सबसे बड़े विजेता बन कर उभर रहे हैं.

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