Sunday, February 15, 2026

देशभर में महाशिवरात्रि की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली। देश भर में आज रविवार को फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व (Mahashivratri festival) धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि में त्रयोदशी-चतुर्दशी का मेल होता है, त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू होती है, वही समय महाशिवरात्रि का विशेष पुण्यकाल (Special Auspicious time.) माना जाता है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार 15 फरवरी को दिन में त्रयोदशी तिथि रहेगी, लेकिन शाम 5:04 बजे चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। ऐसे में पूरी रात्रि में चतुर्दशी ही व्याप्त रहेगी। इसलिए महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है।

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, वरियान व अमृत नामक महा औदायिक योग व निशीथ काल भी बन रहा है। पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, इस दिन सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी सायं 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर रात्रि भर रहेगी। उत्तराषाढ़ नक्षत्र सायं 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। व्यतिपात योग दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात वरियान योग लगेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग पूरे दिन-रात्रि विद्यमान रहेगा। निशीथ काल रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जो भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। प. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:25 से सायं 7:26 तक रहेगा। व्यतिपात योग साधना और जप-तप के लिए विशेष फलदायी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जिसमें पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।

महाशिवरात्रि का महत्त्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि में भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या कालरात्रि भी कहा गया है। पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार इसे शिव विवाह महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है।

मुहूर्त
● चतुर्दशी तिथि उपस्थित : 15 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी शाम 5:34 बजे
● शिवरात्रि का विशष पुण्यकाल : 15 की शाम 5:04 से आरम्भ
● जलाभिषेक का समय : 15 को प्रातःकाल से आरम्भ
● विशेष पुण्यकाल : शाम 5:04 के बाद विशेष पुण्यकाल का अभिषेक होगा

शिव पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त-
निशिता काल पूजा समय – 12:37 ए एम से 01:32 ए एम, फरवरी 16
अवधि – 55 मिनट
शिवरात्रि पारण समय – 16 फरवरी को 07:57 ए एम से 01:04 पी एम तक।
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:11 पी एम से 09:38 पी एम
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:38 पी एम से 01:04 ए एम, फरवरी 16
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 01:04 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 16
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 04:31 ए एम से 07:57 ए एम, फरवरी 16

महाशिवरात्रि की पूजा विधि (घर और मंदिर में कैसे करें पूजा)-
महाशिवरात्रि की पूजा विधि: घर में कैसे करें पूजा- महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर में पूजा करने से पहले पूजा की जगह अच्छे से साफ कर लें। शिवलिंग को भी पानी से धोकर साफ जगह पर रखें। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से एक-एक करके अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक करते समय मन में “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहें। अगर सब चीजें उपलब्ध न हों तो सिर्फ जल और दूध से भी पूजा पूरी मानी जाती है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। साथ में धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। फूल चढ़ाते समय मन में अपनी इच्छा रखें और शिवजी को याद करें। इसके बाद धूप-दीप जलाएं और थोड़ी देर शांत बैठकर शिव मंत्रों का जप करें। मन की बात भगवान शिव से कहें। शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी कर सकते हैं। जो लोग रात में जागकर पूजा कर पाते हैं, वे घर पर ही सरल तरीके से रुद्राभिषेक कर सकते हैं।

घर में शिवलिंग रखने की सही बात-
घर में बहुत बड़ा शिवलिंग रखने की परंपरा नहीं है। आमतौर पर मिट्टी, पत्थर, पीतल या चांदी का छोटा शिवलिंग घर के लिए ठीक माना जाता है। शिवलिंग के साथ गणेश जी, माता पार्वती और नंदी की छोटी मूर्ति रखकर पूजा करना अच्छा माना जाता है।

महाशिवरात्रि की पूजा विधि: मंदिर में कैसे करें पूजा-
अगर मंदिर जाकर पूजा कर रहे हैं तो सुबह स्नान करके साफ कपड़ों में मंदिर जाएं। मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। कई जगहों पर दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक की व्यवस्था होती है, वहां श्रद्धा से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” का मन ही मन जप करते रहें।शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ाएं। पुजारी जी के बताए नियमों का पालन करें। धूप-दीप दिखाकर भगवान शिव का ध्यान करें। अगर संभव हो तो रात में मंदिर जाकर रुद्राभिषेक या विशेष पूजा में शामिल हों। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात की पूजा का खास फल मिलता है।

महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जप-
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए कुछ आसान और असरदार मंत्रों का जप किया जा सकता है। सबसे पहले “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। यह शिव जी का सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस पावन दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप भी किया जाता है–
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं- महाशिवरात्रि या रोज की पूजा में शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है और इसके बाद बेलपत्र जरूर अर्पित करें, क्योंकि यह शिवजी को सबसे प्रिय माना जाता है। साथ में सफेद फूल, आक और धतूरा भी चढ़ाए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर सादे मन से पूजा करें। वहीं शिवलिंग पर केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि मान्यता के अनुसार यह शिव पूजा में वर्जित माना गया है। तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते, इन्हें विष्णु पूजा के लिए रखा जाता है। लाल रंग के तेज खुशबू वाले फूल, टूटे या मुरझाए फूल, बासी फूल और चढ़ाया हुआ प्रसाद दोबारा शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।

Latest news

Related news