Gig Workers Protest: पूरे देश में ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ के आह्वान के कारण ऐप-बेस्ड टैक्सी, ओला, उबर और रैपिडो Ola-Uber-Rapido की सर्विस पर असर पड़ा है. कई लेबर यूनियन दूसरी चीज़ों के अलावा मिनिमम बेस किराए की मांग कर रही हैं और कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हड़ताल छह घंटे तक चलेगी.
यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और दूसरी नेशनल लेबर बॉडीज़ ने बुलाई है, और ड्राइवर एक ही समय में अपने राइड-हेलिंग ऐप बंद कर देंगे। हड़ताल के कारण पोर्टर ऐप से डिलीवरी सर्विस पर असर पड़ेगा.
यूनियन ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी को लिखे एक लेटर में, लेबर ग्रुप ने देश भर में ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के सामने आने वाली “लंबे समय से पेंडिंग और अनसुलझी समस्याओं” को उठाया.
ऐप-बेस्ड टैक्सी ड्राइवरों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया
कई गिग यूनियनों के देशव्यापी ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ आह्वान के बीच ऐप-बेस्ड टैक्सी ड्राइवरों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया.
#WATCH | Delhi: App-based transport workers hold a protest at Jantar Mantar as gig unions call an all-India breakdown.
Telangana GIG and Platform Workers Union’s Founder President, Shaik Salauddin, says, “We have two major demands from the Ministry of Transport and Nitin… pic.twitter.com/T6fLYiWAfY
— ANI (@ANI) February 7, 2026
Ola-Uber-Rapido ड्राइवरों की क्या हैं मांगें?
- तेलंगाना GIG एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष ने बताया कि हमारी केंद्रीय परिवहन विभाग से 2 मांगे हैं. हाल ही में मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 में ऐसा प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार बिना कमर्शियल नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों को भी चलाने की अनुमित दी गई है, जो ड्राइवरों के हितों के खिलाफ है. यूनियन इसका विरोध करता है.
- अध्यक्ष ने दूसरी मांग को लेकर कहा कि कंपनियां अपने हिसाब से किराया को तय करती है, जिसकी वजह से ड्राइवरों और यात्रियों दोनों को नुकसान होता है. यूनियन की मांग है कि इसका अधिकार केवल सरकार के पास रहे, ताकि वो ड्राइवर्स और यात्रियों को ध्यान में रखते हुए फैसला लें. अगर सरकार किराया तय करेगी, तो दोनों को फायदा होगा. इन्हीं दो मांगों को लेकर यूनियन ने देशभर में हड़ताल करने का फैसला लिया है.
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी गिग वर्करों की चिंता
बता दें, हाल ही में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट आई है, जिसमें गिग वर्करों को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया कि गिग इकोनॉमी तो बढ़ रही है लेकिन आय की स्थिरता भी बड़ी समस्या बनकर उभरी है. यानी करीब 40 प्रतिशत गिग वर्करों की सैलरी 15 हजार रुपए से कम है. अगर आप भी शहर में कहीं आने-जाने के लिए ओला, उबर और रैपिडो का इस्तेमाल करते हैं, तो शनिवार को यात्रा करने से पहले स्थिति जरूर चेक करें या फिर पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था करें.

