Airfare Capping Issue : केंद्रीय उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडु का कहना है कि पूरे साल के लिए किसी रुट पर हवाई किराये को लेकर किराया कैपिंग करना सरकार के लिए संभव नहीं है, क्योंकि किराया डिमांड और सप्लाई से ही तय होता है.फाइनल प्राइस डिमांड और सप्लाई से ही तय किया जाता है.
#Watch | Union Minister of Civil Aviation Ram Mohan Naidu (@RamMNK) addressed the Lok Sabha on rising airline fares, highlighting how the government steps in during extraordinary situations to prevent opportunistic pricing and protect passengers.#LokSabha #CivilAviation… pic.twitter.com/aWIC4Y4R07
— DD India (@DDIndialive) December 12, 2025
Airfare Capping Issue:हवाई यात्रा किराये को कैसे किया जाये नियंत्रित ?
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में शुक्रवार को सिविल एवियेशन मिनिस्टर राममोहन नायडु ने कहा कि साल भर के लिए हवाई किराये को निश्चित करने सरकार के लिए संभव नहीं है, हलांकि हवाई टिकटों की कीमत पर नजर रखने के लिए सिविल एवियेशन मंत्रालय(DGCA) में एक टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट बनाई गई है. ये यूनिट इस बात की मॉनेटरिंग करती है कि एयरलाइंस मंजूर टैरिफ शीट के हिसाब से किराया तय कर रही हैं या नहीं. मॉनिटरिंग के जरिये पारदर्शिता बढ़ती है और अगर कोई शिकायत आती है, तो तुरंत कार्रवाई करना आसान होता है.
किराया कैप करना संभव नहीं – सिविल एवियेशन मिनिस्टर
इंडिगो संकट के बाद जिस तरह से देशभर की एयरलाइन्स ने लूट खसोट मचाई, उसके बाद लगातार ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकार का हवाई किरायों पर कोई नियंत्रण है या नहीं ?
इस सवाल के जवाब में आज नागरिक उड्डयन मंत्री ने संसद में साफ किया कि सरकार साल भर के लिए किसी निश्चित रुट पर किराये के लिए कैपिंग नहीं कर सकती है , यानी किराया तय नहीं कर सकती. इसकी वजह ये है कि टिकटों की कीमत डिमांड और सप्लाई पर निर्भर है. मांग और आपूर्ति ही टिकटों की कीमत तय करती है. हां जरुरत पड़ने पर सरकार दखल देती है लेकिन पूरे साल एक तय किराया रखना व्यवहारिक नहीं है.
नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि हवाई टिकटों के किराये में दो बातें जरुरी हैं-पहला यात्रियों की सुरक्षा और दूसरा मार्केट का ग्रोथ . 1994 में जब मार्केट में डिरेगुलेशन हुआ तब एयरलाइंस की संख्या बढ़ी और प्रतिस्पर्धा बढी और इसका फायदा सीधा यात्रियों को मिला. सरकार के पास खास परिस्थितियों में किराया तय करने का अधिकार तो है,लेकिन किराये को नियमित करने के ये समाधान नहीं है.
‘कैपेसिटी बढ़ी तो मिलेगा समाधान‘
उड्डयन मंत्री ने कहा कि इस समस्या का असली समाधान तब मिलेगा जब डिमांड बढ़ने पर सप्लाई या कैपेसिटी बढ़ाई जाए. जैसे कुंभ के मेले के समय प्रयागराज जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी, तब सरकार ने फ्लाइट्स की भी संख्या बढ़ाईं. फ्लाइट्स की संख्या बढ़ने से यात्रियों को राहत मिली.
बढ़े किराये पर कैसे लगेगी लगाम ?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडु का बयान ऐसे समय में आया है,जब देश भर में इंडिगो एयरलाइन की मनमानी के कारण बिगड़े हालत और हवाई किराये में आई उछाल को नियंत्रित करने के लिए सरकार से मांग की जा रही है. बीते दिनों सरकार ने एयरलाइन्स की मनमानी पर डीजीसीए के नियमों के तहत नकेल भी कसी लेकिन अब एक बार फिर से सरकार के इस बयान ने लोगों के संदेह को बढ़ा दिया है. देखा जाये तो उड्डयन मंत्री का ये बयान एक प्रकार से एयरलाइन्स की मनमानी और बढ़े किराये को नियंत्रित करने से सरकार का हाथ पीछे खींचने की तरफ इशारा है. लोग पहले से ही बढ़े हवाई किराये से परेशान हैं , ऐसे में उड्डन मंत्री का ये बयान लोगों की चिंता बढ़ाने वाला ही मालूम पड़ता है .

