Tuesday, January 27, 2026

2020 दिल्ली में हुए दंगो को लेकर दिल्ली पुलिस का सुप्रीमकोर्ट में सनसनीखेज दावा, दं’गा ‘Regime Change Operation था ..

Delhi riots 2020 : दिल्ली में 2020 में हुए दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में एक सनसनीखेज दावा किया है. दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामें में कहा है कि दिल्ली में 2020 में हुआ दं’गा कोई अचानक हुआ दं’गा नहीं था बल्कि इसके पीछे सोची समझी साजिश थी. हलफनामे में साफ तौर से कहा गया है कि 2020 के दिल्ली दं’गे ‘Regime Change Operation’ यानी शासन को बदलने के लिए चलाया गया एक ऑपरेशन था. दिल्ली पुलिस के इस दावे के बाद 2020 के दं’गों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

Delhi riots 2020 : दं’गा एक गहरी साजिश थी….

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किये गये अपने हलफनामें में कहा है कि दिल्ली में 2020 में हुए हलफनामें केवल कानून और व्यवस्था की समस्या नहीं थी बल्कि ये एक गहरी साजिश थी, जिसके पीछे एक राजनीतिक मकसद वाला ऑपरेशन था. दिल्ली पुलिस ने दंगे के आरोपियों की बेल याचिका पर सुनवाई के दौरान ये हलफनामा दिया है.

दिल्ली पुलिस ने 2020 दिल्ली दंगों की साज़िश करने के मामले के आरोपियों उमर खालिद, शरजील इमाम , मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और कुछ अन्य आरोपियों की ज़मानत का विरोध करते हुए एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया, जिसमें कहा कि ये दिल्ली में हुई वो हिंसा एक कोऑर्डिनेटेड ‘शासन-परिवर्तन ऑपरेशन'(Regime Change Operation) का हिस्सा था.

हलफनामें में दिल्ली पुलिस ने ये दावा  किया है कि वो दंगे अचानक हुआ कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की आंतरिक शांति और अंतरराष्ट्रीय स्थिति को अंतराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिर करने की सोची-समझी एक कोशिश थी.

आरोपियों ने भारत की संप्रभुता को खतरे में डाला – दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामें में ये दावा किया है कि जांच के दौरान जो दस्तावेजी सबूत मिले हैं, वो ‘सांप्रदायिक आधार पर रची गई एक गहरी साज़िश’ की तरफ इशारा करते हैं. जांचकर्ताओं को इस थ्योरी से जोड़ने वाले प्रत्यक्ष, दस्तावेजी और तकनीकी सबूत मिले हैं. ये दं’गा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के खिलाफ मौजूद असहमति को हथियार बनाकर “भारत की संप्रभुता और अखंडता पर हमला करने के लिए” रची साजिश थी.

दिल्ली पुलिस ने अपने हलफमाने में दावा किया है कि ‘हिंसा का मकसद देश की अंदरूनी शांति और अंतरराष्ट्रीय छवि को खराब करना था . CAA को एक मुस्लिम विरोधी कानून बताकर अशांति देश की राजधानी में अशांति फैलाना था. हलफनामें में आरोपियों को लेकरये आरोप लगाया गया कि यह साज़िश अमेरिकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय जानबूझ कर समय की नजाकत को देखते हुए की गई थी, ताकि अंतराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भारत के सीएए कानून की तरफ खींचे और इसकी एक गलत तस्वीर पूरी दुनिया में दिखाई जाये.

दंगे के आरोपियों पर दिल्ली पुलिस का आरोप

दिल्ली पुलिस ने 2020 दंगे के आरोपियों शरजील इमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर और गुलफिशा फातिमा के लिए याचिकाकर्ताओं की प्रार्थना को  ‘बेवजह की अर्जियों’ और ‘तालमेल वाले असहयोग’ के ज़रिए ट्रायल की कार्यवाही में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है.

दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को लेकर दावा किया कि इन लोगों ने जानबूझ कर निचली अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए ‘प्रक्रिया का खुलेआम दुरुपयोग’ किया. हलफनामें में पुलिस ने ये तर्क दिया है कि कार्यवाही में देरी जांच एजेंसियों की वजह से नहीं, बल्कि खुद आरोपियों की वजह से हुई है.

ये नियम नहीं….हर आरोपी को बेल मिले..

दिल्ली पुलिस ने UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम  का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे गंभीर और आतंकवाद से जुड़े अपराधों के लिए ‘जेल, बेल नहीं’ ही नियम है, यानी इन आरोपियो को बेल पाने का अधिकार नहीं हैं.हलफनामे में ये भी कहा गया है कि जांच के दौरान आरोपी अपराध के शुरुआती सबूतों को गलत साबित करने में नाकाम रहे हैं. इनके अपराधों की गंभीरता ट्रायल में देरी के कारण रिहाई की इजाज़त नहीं देती है.

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