नये उपराष्ट्रपति से कांग्रेस की अपील – तानाशाह मत बन जाइयेगा

New VP CP Radhakrishnan:  नये निर्वाचित हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को कांग्रेस पार्टी ने शुभाकानाएं दी है लेकिन शुभकामनाओं को साथ ही एक नसीहत भी दी है.कांग्रेस पार्टी ने नये उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को पूर्व उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें उनकी तरह ही कर्तव्य निभाने चाहिये. कांग्रेस ने कहा कि आप कर्तव्य निभाइयेगा, लेकिन तानाशाह मत बन जाइयेगा.

New VP CP Radhakrishnan दिलाई सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद 

कांग्रेस पार्टी ने नये उपराष्ट्रपति को सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 1952 में राज्यसभा में कही गई उस बात की याद दिलाई जिसमें उन्होने कहा था कि अगर कोई लोकतंत्र विपक्षी दलों को सरकार की नीतियों के खिलाफ स्वतंत्र और निष्पक्ष आलोचना करने की इजाजत नहीं देता है, तो वह तानाशाही में तब्दील हो जाता है.कांग्रेस पार्टी ने सीपी राधाकृष्णन को बधाई देते हुए कहा कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जो कुछ कही था ,उसका अक्षरशः पालन भी किया.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर किया पोस्ट

कांग्रेस पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ एक पर पोस्ट लिखा है- नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, जो राज्यसभा के सभापति भी होंगे, उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कांग्रेस भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के प्रथम सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रेरक शब्दों को स्मरण करती है.

जयराम रमेश ने दिलाई सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नये उपराष्ट्रपति को याद दिलाया कि “पूर्व उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधा कृष्णन ने राज्यसभा सभापति के रूप में कहा था कि वो सदन में मौजूद हर दल के हैं,और उनका प्रयास संसदीय लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखना और प्रत्येक दल के प्रति पूरी निष्पक्षता के साथ कार्य करना होगा.

जयराम रमेश ने आगे आगे लिखा है कि – 6 मई, 1952 को राज्यसभा के उद्घाटन के अवसर पर डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था, मैं किसी एक दल का नहीं हूं, और इसका अर्थ यह है कि मैं इस सदन के हर दल का हूं. मेरा प्रयास संसदीय लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखना होगा और प्रत्येक दल के प्रति पूर्ण निष्पक्षता और समानता के साथ कार्य करना होगा , किसी के प्रति द्वेष नहीं. सभी के प्रति सद्भावना रखते हुए…यदि कोई लोकतंत्र विपक्षी समूहों को सरकार की नीतियों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और स्पष्ट आलोचना करने की अनुमति नहीं देता है, तो वह तानाशाही में बदल सकता है.”

 

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