Justice Yashwant Verma Impeachment : जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाये जाने की सिफारिश को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को एक बार फिर से सुनवाई हुई. इस मामले में जस्टिस वर्मा का पक्ष उनके वकील कपिल सिब्बल रखा. कपिल सिब्बल ने अपने मुवक्किल के पक्ष में दलीलें रखते हुए जो बातें कहीं उसपर गर्मागरम बहस हुई और सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणियां कीं.
Justice Yashwant Verma Impeachment : तीन जजों की बेंच वैध या अवैध ?
जस्टिस वर्मा के वकील कपिल सिब्बल ने अपना पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के द्वारा बनाई गई आंतरिक कमेटी की जांच पर सवाल उठाए. सिब्बल ने कहा कि ऐसा हमारे पास कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट के किसी जज के खिलाफ इंटरनल इन्वायरी के आधार पर उनके खिलाफ महाभियोग की सिफारिश किया जा सकेर . कपिल सिब्बल ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के उस फैसले पर सवाल उठाया जिसमें उन्होने कैश कांड मे घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन जजों की कमेटी गठित की थी.
सुप्रीमकोर्ट की कमेटी में जस्टिस वर्मा की भूमिका पर उठे थे सवाल
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बनाई गई तीन जजों की कमिटी ने अपनी आंतरिक जांच में जस्टिस वर्मा की भूमिका को गलत पाया गया था. अपनी जांच के आधार पर ही कमेटी ने जो रिपोर्ट दी उसके आधार पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ये सिफारिश भेजी थी कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाया जाए.
जब जस्टिस वर्मा के वकील कपिल सिब्बल ने जांच कमेटी पर जब सवाल उठाए तो जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इसका तीखा जवाब दिया. दोनों जजों के बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इनहाउस जांच की व्यवस्था 1999 में आई थी और उसी के आधार पर ऐक्शन लिया जाता है.
चीफ जस्टिस कोई पोस्ट ऑफिस नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट और उनके जजों की देश के प्रति कुछ जिम्मेदारी होती है.अगर मुख्य न्यायधीश के समक्ष ऐसी कोई चीज आती है, जिससे ऐसा लगता है कि कुछ गड़बड़ी हुई है, तो वो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बता सकते हैं.
बहस आगे बढ़ी तो कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर आपने पहले ही मन बना लिया है तो क्या किया जाए. इसपर दोनो जजों ने कहा कि जब तक आप दलील देंगे हम चुप रहेंगे. आपकी दलील सुनी जायेगी. फैसला इसके बाद ही देंगे लेकिन ऐसा करना सही नहीं होगा, इसलिए हम बोल रहे हैं.
जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग से होगी गलत परंपरा की शुरुआत
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपनी दलील में कहा कि जिस तरह से जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाया जा रहा है, अगर वो आगे बढ़ा तो गलत उदाहरण पेश होगा. कोर्ट को उस रिपोर्ट के भरोसे ऐक्शन नहीं लेना चाहिये.
सिब्बल की दलील पर बेंच ने जवाब दिया और कहा कि आप अपनी बात करें. कमेटी से असंवैधानिक होने पर रहे और अपनी दलील दें. इस रिपोर्ट को बीच में ना लायें.
तीन जजों के पैनल को अवैध ठहराने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित
जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार किसी जज को हटा सकती है,लेकिन इसके लिए कोई कानून नहीं है. अगर सरकार ऐसा कोई कानून बनाती है तो हम उसका परीक्षण करेंगे. कोर्ट ने कपिल सिब्बल से कहा कि आप इस मामले में केंद्र सरकार की शक्तियों पर बात न करें, बल्कि सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट की बात करें.
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीन जजों के पैनल को अवैध ठहराने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है

