Tuesday, February 24, 2026

आरक्षण बिल पर हस्ताक्षर से राज्यपाल का इंकार दुर्भाग्यपूर्ण, आरक्षण सभी के हित में-थानेश्वर साहू

रायपुर

छत्तीसगढ़ में आरक्षण बिल पर घमासान जारी है. राज्यपाल अनुसूइया उइके ने पिछले दिनों सरकार द्वारा सर्वसम्मति से पास किये गये आरक्षण बिल को बड़ा बताकर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था.राज्यपाल द्वारा संशोधित आरक्षण बिल पर हस्ताक्षर ना करने को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग के  अध्यक्ष थानेश्वर साहू ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. थानेश्वर साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आरक्षण केवल एक वर्ग या जाति के लिए नहीं है, बल्कि प्रदेश के सभी पिछड़ी जातियो के हित में हैं.

आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ में हाइकोर्ट द्वारा आरक्षण को रद्द कर दिये जाने के बाद राज्य की भूपेश बघेल सरकार ने विधानसभा में सर्वसम्मति से एक आरक्षण पर प्रस्ताव पास कराया जिसमें 32 प्रतिशत आरक्षण अनूसूचित जन जाति के लिए, 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लिए , पिछडा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत और EWS के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा गया था. कुल मिलाकर राज्य में 72 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया था. ये प्रस्ताव सरकार ने 2 दिसंबर 2022 को पास किया और उसे उसी दिन राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया था लेकिन राज्यपाल अनुसूइया उनके ने ये कहते हुए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया कि सरकार ने जो इतना बड़ा आरक्षण प्रस्ताव पास किया है उसका आधार क्या है. राज्यपाल ने कहा कि  ये मामला बहुत बड़ा है. जब तक मैं मामले में संतुष्ट नहीं हो जाती हूं, अपनी मंजूरी नहीं दूंगी.

राज्यपाल ने कहा कि अगर केवल आदिवासियों के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण की बात होती तो कोई परेशानी नहीं थी लेकिन सरकार ने जिस तरह से आरक्षण बढ़ाया है, सरकार को उसका आधार साफ करना होगा.

राज्यपाल के हस्ताक्षर से इंकार के बाद आरक्षण बिल लटक गया है. भूपेश बघेल सरकार के मुताबिक जब तक राज्य में नये आरक्षण प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल जाती है, तबतक नये एडमिशन से लेकर नयी नियुक्तियां तक, सारी प्रक्रिया रुकी हुई है. आरक्षण प्रस्ताव पास होने के बाद ही सरकार किसी तरह की नियुक्ति या एडमिशन के लिए सर्कुलर निकाल सकती है.

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