कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास के उस कदम का खुलकर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने एक निजी बैंक को चिट्ठी लिखकर पार्टी के मुख्य अकाउंट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की अपील की थी। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक पारे को और बढ़ा दिया है।
विपक्ष के नेता ने उठाए पार्टी फंड पर सवाल
गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने पूर्व कोषाध्यक्ष के स्टैंड की सराहना की। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि अरूप बिस्वास द्वारा उठाए गए मुद्दे बेहद गंभीर हैं। इस बात का क्या भरोसा कि टीएमसी के इस बैंक खाते में जमा रकम किसी घोटाले या हेराफेरी की नहीं है? उन्होंने साफ किया कि वे खाते को फ्रीज किए जाने की मांग के साथ खड़े हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगभग 58 विधायकों की बड़ी बगावत झेल रही टीएमसी के बीच ऋतब्रत बनर्जी इस मौके का फायदा उठाकर अपने गुट को 'असली' तृणमूल कांग्रेस के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जुटे हैं।
करोड़ों के खाते पर दावेदारी और फ्रीज करने की मांग
यह पूरा विवाद तब गर्माया जब पूर्व मंत्री और पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा को पत्र भेजकर वित्तीय लेनदेन पर तत्काल रोक लगाने को कहा। चुनाव आयोग को दी गई ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इस विशिष्ट खाते में करीब 675 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा है। बिस्वास ने बैंक प्रबंधन से गुजारिश की है कि जब तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई का कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक इस खाते से किसी भी तरह की निकासी की अनुमति न दी जाए। यह पत्र 12 जून को लिखा गया था, जो बैंक अधिकारियों को 16 जून को प्राप्त हुआ।
पद से हटाए जाने के बाद भी बिस्वास का बड़ा दावा
इस मामले में सबसे दिलचस्प पेंच पद और अधिकार को लेकर फंसा है। हालिया विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद, टीएमसी ने बीती 5 जून को संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए अरूप बिस्वास की जगह पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त कर दिया था। इसके बावजूद, बैंक को भेजे गए आधिकारिक पत्र में बिस्वास ने खुद को ही पार्टी का मौजूदा और वैध कोषाध्यक्ष बताया है। उन्होंने दलील दी है कि विरोधी गुट अवैध रूप से खुद को असली टीएमसी बताकर खाते का संचालन करने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे पहले से साइन किए गए चेकों का दुरुपयोग होने का बड़ा खतरा है।

