सितंबर के तीसरे हफ्ते में संसद का विशेष सत्र? परिसीमन पर सरकार का मंथन तेज

नई दिल्ली: केंद्र सरकार मध्य सितंबर के बाद संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की रूपरेखा तैयार कर रही है। इस सत्र का मुख्य फोकस परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। इसके साथ ही, विशेष सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार की भी चर्चा है, ताकि एनडीए (NDA) का कुनबा बढ़ाया जा सके। मानसून सत्र समाप्त होने के दो हफ्ते बाद भी सत्रावसान (Prorogation) न किए जाने से विशेष सत्र की अटकलों को बल मिला है।

कैबिनेट विस्तार और विशेष सत्र से जुड़े दो बड़े राजनीतिक घटनाक्रम

  • डीएमके को एनडीए में लाने की कवायद: सरकार और डीएमके (DMK) के बीच परिसीमन को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है। सरकार ने डीएमके को राज्यों की लोकसभा सीटों में आनुपातिक आधार पर 50% बढ़ोतरी का आश्वासन लिखित रूप में देने की बात कही है। डीएमके के समर्थन के बिना सरकार दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सहज नहीं होगी।

  • एनसीपी के दोनों धड़ों के विलय की बातचीत: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर लगातार मध्यस्थता कर रहे हैं। इन सभी राजनीतिक घटनाक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके मध्य एशिया दौरे से लौटने के बाद सौंपी जाएगी।

तीन साल के इंतजार के बाद भारतीय मध्यस्थता परिषद (MCI) का गठन

एक अन्य प्रमुख फैसले में, केंद्र सरकार ने 'मध्यस्थता अधिनियम 2023' के तहत देश में संस्थागत विवादों के निपटारे के लिए मध्यस्थता परिषद (Arbitration Council of India) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है।

  • मुख्य कार्य: यह परिषद देश में मध्यस्थता सेवाओं, प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों और प्रमाणन प्रक्रिया को मान्यता देने व विनियमित (Regulate) करने का काम करेगी।

  • देरी का कारण: संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। इससे पूर्व अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने योग्य उम्मीदवारों और मानव संसाधन की कमी को इस गठन में हुई देरी की मुख्य वजह बताया था।

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