परंडा (धाराशिव)। महाराष्ट्र की राजनीति में जारी सरगर्मी के बीच धाराशिव जिले के परंडा तालुका से कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के पूर्व तालुकाध्यक्ष एडवोकेट हनुमंत वाघमोडे ने अपने सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया है। इस राजनीतिक फेरबदल को क्षेत्र में कांग्रेस के लिए एक बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।
शिवसेना नेतृत्व पर जताया भरोसा
एडवोकेट हनुमंत वाघमोडे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और परंडा-भूम-वाशी विधानसभा क्षेत्र के विधायक तथा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. तानाजी सावंत की कार्यशैली व विकासोन्मुखी नीतियों पर अपनी गहरी आस्था जताई है। उनके अनुसार, एकनाथ शिंदे के सर्वसमावेशी नेतृत्व से प्रभावित होकर ही उन्होंने और उनके साथियों ने शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया है। इस बड़े दलबदल से जमीनी स्तर पर परंडा तालुका में शिवसेना का सांगठनिक ढांचा और अधिक मजबूत हुआ है।
शामिल होने वाले प्रमुख नेता और पदाधिकारी
वाघमोडे के साथ कांग्रेस संगठन के कई दिग्गज पदाधिकारियों ने भी पार्टी छोड़कर शिवसेना में प्रवेश किया है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
उपाध्यक्ष: उत्तरेश्वर ठवरे और हनुमंत करले
कोषाध्यक्ष: लक्ष्मण खरातोडे
महासचिव: नारायण साबले, पांडुरंग चौबे
सचिव: संदीप ठवरे, यूनुस शेख, दादासाहेब आलदर, दत्तात्रय खांडकेर
विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष: अवधूत पाटिल (लीगल सेल), अनवर शेख (अल्पसंख्यक सेल), महावीर इतापे (ओबीसी सेल), बालाजी गवारे (सेवादल) और भैरवनाथ यादव।
ग्रामीण स्तर पर भी कांग्रेस को झटका
शीर्ष पदाधिकारियों के साथ-साथ परंडा तालुका के विभिन्न गांवों से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने शिवसेना का 'भगवा' थामा है। इनमें ढगपिंपरी, डोमगांव, पिंपलवाड़ी, वाकडी, वडनेर, मुगांव, डोंजा, वागेगव्हाण, शिराला और हिंगणगांव समेत कई गांवों के सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हैं।
पक्ष प्रवेश समारोह के दौरान स्थानीय शिवसेना नेताओं ने नए शामिल हुए सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भगवा गमछा पहनाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बड़े पैमाने पर हुए दलबदल से आगामी चुनावों में परंडा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और विपक्षी दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

