RJD को बड़ा झटका! बांकीपुर उपचुनाव से पहले मृत्युंजय तिवारी ने दिया इस्तीफा

पटना। बिहार की सियासत और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने गुरुवार को अपने सभी सांगठनिक पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के ठीक पहले आए इस फैसले को राजद के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। लंबे समय से लालू प्रसाद यादव के विश्वसनीय सहयोगियों में शुमार रहे मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर प्रवक्ता पद सहित अपनी तमाम जिम्मेदारियां सौंप दी हैं।

क्यों नाराज होकर तिवारी ने छोड़ दिए सारे पद

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, मृत्युंजय तिवारी के इस बड़े कदम के पीछे राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के साथ चल रहा उनका पुराना मनमुटाव है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच कई मौकों पर पार्टी दफ्तर के भीतर ही तीखी बहस और नोकझोंक हुई थी। तिवारी ने इस आंतरिक कलह और मनमुटाव की शिकायत कई बार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से भी की थी, लेकिन नेतृत्व की तरफ से कोई ठोस एक्शन न लिए जाने से वे काफी आहत थे।

आरोप यह भी है कि इस विवाद के बाद उन्हें संगठन में किनारे किया जाने लगा था। टीवी चैनलों की बहसों (डिबेट) में उनकी जगह दूसरे चेहरों को तरजीह दी जाने लगी और धीरे-धीरे उनकी सांगठनिक ताकत को भी कम कर दिया गया, जिससे बेहद असहज महसूस कर रहे मृत्युंजय तिवारी ने आखिरकार नाता तोड़ने का मन बना लिया।

लालू यादव ने सुलह के लिए आज बुलाया, मुख्य प्रवक्ता पर भी तने सुर

मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे की खबर फैलते ही राजद खेमे में हड़कंप मच गया, जिसके बाद खुद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मामले को संभालने की कमान संभाली है। उन्होंने तिवारी को आज यानी शुक्रवार को मुलाकात के लिए तलब किया है, जहाँ वे उन्हें मनाने और पार्टी में रोकने की आखिरी कोशिश करेंगे। हालांकि, अंदरखाने से जुड़े लोगों का दावा है कि तिवारी अब मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के रहते आगे काम करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।

इसी खींचतान के बीच, पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेताओं ने मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव की संपत्ति को लेकर भी अंदरूनी मोर्चा खोल दिया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि साल 2015 के चुनावी हलफनामे में जो घोषित संपत्ति लगभग 70 लाख रुपये थी, वह साल 2025 तक आते-आते करीब 11 करोड़ रुपये के भारी-भरकम आंकड़े तक कैसे पहुंच गई। चर्चा है कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे आने के बाद इस गंभीर मुद्दे पर शक्ति यादव को घेरने की तैयारी की जा रही है।

सांसद अभय कुशवाहा के पाला बदलने की अटकलें तेज

राजद की मुश्किलें सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो रही हैं, बल्कि औरंगाबाद से पार्टी के मौजूदा सांसद अभय कुशवाहा को लेकर भी सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक हल्कों में यह चर्चा बेहद गर्म है कि कुशवाहा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के तौर-तरीकों से गंभीर रूप से नाराज हैं और वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं के सीधे संपर्क में बने हुए हैं।

इतना ही नहीं, कयास तो यह भी हैं कि बांकीपुर विधानसभा के उपचुनाव खत्म होते ही राजद के कुछ और बड़े व कद्दावर नेता भी सामूहिक रूप से लालटेन का साथ छोड़ सकते हैं। हालांकि, सांसद अभय कुशवाहा अथवा भाजपा खेमे की ओर से इस संभावित दलबदल को लेकर अभी तक कोई भी औपचारिक बयान या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

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