बक्सर/पटना: बिहार के सियासी गलियारे में इन दिनों बयानों के तीर और राजनीतिक बिसात बिछाने का खेल चरम पर है. इसी बीच जन सुराज पार्टी के प्रणेता प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य और उनके अतीत को लेकर भी चर्चाओं का बाजार काफी गर्म हो गया है. चुनावी रणनीतियों के परदे के पीछे से निकलकर सीधे सक्रिय राजनीति के मैदान में उतरे प्रशांत किशोर अक्सर मौजूदा नेताओं के ज्ञान और उनकी दूरदर्शिता पर तीखे सवाल खड़े करते दिखाई देते हैं.
विपक्ष ने घेरा तो खुला शैक्षणिक रिकॉर्ड
जब प्रशांत किशोर ने अन्य नेताओं की समझ को चुनौती देना शुरू किया, तो पलटवार में विपक्षी दलों ने खुद उनकी अपनी योग्यता को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. विरोधियों की ओर से लगातार यह सवाल उछाला जाने लगा कि देश के बड़े-बड़े दिग्गजों को चुनाव जिताने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर खुद कितने शिक्षित हैं और उनका शैक्षणिक इतिहास क्या रहा है. इस सियासी घमासान और कयासों के बीच अब उनके एक चुनावी हलफनामे ने इस पूरे विवाद पर विराम लगा दिया है, जिसमें उनकी पढ़ाई-लिखाई का पूरा ब्यौरा साफ-साफ दर्ज है.
स्कूली शिक्षा से लेकर कॉलेज तक का सफर
चुनावी दस्तावेज के अनुसार प्रशांत किशोर की शुरुआती और उच्च माध्यमिक शिक्षा बिहार में ही संपन्न हुई है. उन्होंने साल 1991 में बक्सर के एम.पी. हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने राजधानी का रुख किया और साल 1993 में पटना के विख्यात पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट (विज्ञान) की पढ़ाई पूरी की.
प्रबंधन की डिग्री और विदेशी भाषा का ज्ञान
हलफनामे के मुताबिक अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद प्रशांत किशोर ने प्रबंधन (मैनेजमेंट) की राह चुनी. उन्होंने साल 1996 से 1999 के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय के बिजनेस स्टडीज विभाग से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी बीबीए की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने साल 2003 में हैदराबाद के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई पूरी की, जो कि अमेरिका की प्रसिद्ध जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के सहयोग से चलाया जाने वाला एक विशेष कोर्स था. इतना ही नहीं, उन्होंने साल 2010 में फ्रांस के एक संस्थान से गहन फ्रेंच भाषा का डिप्लोमा भी प्राप्त किया है.

