लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तेज हो गई है, हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर साफ होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है। जहां कांग्रेस जल्द से जल्द सीटों पर फैसला चाहती है, वहीं सपा का मुख्य जोर हर सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर है।
सपा का फिलहाल राज्यसभा चुनाव पर फोकस
फिलहाल समाजवादी पार्टी का पूरा ध्यान राज्यसभा चुनाव पर केंद्रित है। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि दिवाली के बाद दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या तय हो जाएगी। इसके बाद दोनों ही दल अपनी सुविधा, तत्कालीन राजनीतिक हालात और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करेंगे।
पाला बदलने का खेल और भाजपा की नजर
चुनावी सुगबुगाहट के साथ ही राज्य में 'पाला बदलने' का दौर भी जोर पकड़ने लगा है। हालांकि कुछ पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री पहले ही कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं, लेकिन अक्टूबर के दूसरे और तीसरे हफ्ते से नेताओं के पार्टी छोड़ने और दूसरे दलों में शामिल होने का सिलसिला और तेज होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नजरें सपा के उन असंतुष्ट नेताओं पर टिकी हैं, जो गठबंधन के तहत सीट कांग्रेस के खाते में जाने के बाद भी चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं।
संयुक्त रैलियां और जिलावार घोषणा पत्र
दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बात पर सहमति बन चुकी है कि चुनाव की औपचारिक घोषणा के बाद दोनों दल साझा रैलियों के जरिए जनता के सामने आएंगे और संयुक्त मुद्दों को उठाएंगे। सपा जिला स्तर पर अपना घोषणा पत्र तैयार करेगी, जिसमें कांग्रेस के सुझावों और राय को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, 'वोट चोरी' के मुद्दे पर 'इंडिया' गठबंधन के तहत आयोजित होने वाली आगामी रैलियों में भी सपा अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएगी।
नए प्रदेश अध्यक्ष के आने से सुधरेंगे समीकरण
कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने से दोनों दलों के संबंधों में एक नया माहौल देखने को मिल सकता है, क्योंकि नए प्रदेश अध्यक्ष के सपा के साथ अच्छे संबंध माने जाते हैं। ऐसे में सीटों को लेकर पहले जैसी तल्ख बयानबाजी कम होने की उम्मीद है। हालांकि, कांग्रेस के प्रांतीय नेता लगातार 150 सीटों की मांग कर रहे हैं, जिसे सपा के कई सांसद पहले ही नकार चुके हैं। कांग्रेस की मूल मंशा हर जिले से कम से कम एक सीट पर चुनाव लड़ने की है।
सीट बंटवारे का संभावित फार्मूला
सूत्रों के मुताबिक, सपा 2017 के विधानसभा चुनाव के वक्त अपनाए गए फार्मूले पर राजी नहीं है। वह 2022 के चुनाव में सहयोगियों को दी गई सीटों से कुछ अधिक सीटें देकर कांग्रेस को मनाने की कोशिश कर रही है। 2017 में कांग्रेस को 105 सीटें देने का ऐलान हुआ था, लेकिन अंत में कांग्रेस 114 सीटों पर लड़ी थी, जिसके चलते कुछ जगहों पर सपा और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने आ गए थे। अब लगभग दस साल बाद सपा 311 सीटों के बजाय करीब 350 सीटों पर खुद चुनाव लड़ने के मूड में है।
बसपा छोड़कर कांग्रेस और सपा में शामिल होने की तैयारी
नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस में शामिल होने के बाद, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार में मंत्री रहे तीन-चार अन्य नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। इन नेताओं की पिछले दिनों कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात भी हो चुकी है। कांग्रेस सही समय आने पर इन्हें पार्टी में शामिल करेगी और इनमें से कई मजबूत चेहरों को सपा के सामने संभावित प्रत्याши के रूप में पेश किया जा सकता है।

