नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता में आने से रोकने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के समक्ष गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। ओवैसी ने इसके लिए 2 अक्टूबर तक की समय-सीमा (अल्टीमेटम) तय की है। तय वक्त तक जवाब न मिलने की स्थिति में उनकी पार्टी ने अपने दम पर अकेले चुनाव मैदान में उतरने और लगभग 150 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है।
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव और समीकरण
आबादी का हिस्सा: उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है।
प्रभावी सीटें: राज्य के लगभग 10 जिलों में मुस्लिम आबादी 33 से 50 प्रतिशत के बीच है। कुल 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 57 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
मुख्य प्रभाव वाले क्षेत्र: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रामपुर, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, सहारनपुर, शामली और अमरोहा जैसे जिलों में मुस्लिम बहुलता अधिक है।
ओवैसी की बढ़ती सक्रियता और चुनावी दौरे
AIMIM प्रमुख ओवैसी लगातार उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। अपनी पार्टी की राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए उन्होंने बहराइच, बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, कानपुर, श्रावस्ती और आजमगढ़ जैसे जिलों में सभाएं व कार्यक्रम किए हैं।
पिछला चुनावी प्रदर्शन और आगामी रुख
2017 चुनाव: इस चुनाव में AIMIM ने 38 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे।
2022 चुनाव: पार्टी ने अपनी पहुंच बढ़ाते हुए 85 सीटों पर चुनाव लड़ा।
हालांकि दोनों ही चुनावों में पार्टी का राज्यव्यापी वोट प्रतिशत सीमित रहा, लेकिन कई सीटों पर इसके उम्मीदवारों को मिले वोट जीत-हार के अंतर से ज्यादा थे। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में AIMIM की रणनीति, सीटों का दायरा और उसका अंतिम प्रदर्शन राज्य के अन्य राजनीतिक दलों के समीकरणों को कितना प्रभावित करेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

