चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर राज्य के नागरिकों के लिए एक बेहद अनोखी और नई कल्याणकारी योजना का एलान किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य में जन्म लेने वाले सभी नवजात शिशुओं को उपहार के रूप में सोने की अंगूठी प्रदान की जाएगी। यह अनूठी योजना आगामी 15 सितंबर से पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी, जिसके क्रियान्वयन पर लगभग 755 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
मुख्यमंत्री विजय का बड़ा एलान
चेन्नई स्थित ऐतिहासिक राज्य सचिवालय परिसर में स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा फहराने के बाद अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन में मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि भ्रष्टाचार का पूरी तरह खात्मा करना ही सच्ची आजादी के समान है और हमारी सरकार इसी मुख्य लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम अपनी सरकार के विरुद्ध सक्रिय रहने वाली सभी राजनीतिक ताकतों और साजिशों को पूरी ताकत से हराएंगे। 15 सितंबर को नवजात बच्चों के लिए 755.83 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से शुरू होने वाली यह 'सोने की अंगूठी उपहार योजना' राज्य के परिवारों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित होगी।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनकी सरकार उन सभी नीतियों का पुरजोर विरोध करना लगातार जारी रखेगी, जो उनकी दृष्टि में राज्य के स्वायत्त अधिकारों को कमजोर करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार के साथ सुचारू प्रशासनिक और विकासात्मक सहयोग बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी खजाने के राजस्व को निजी हाथों में जाने से रोकने के लिए हमारी सरकार ने कई कड़े और जरूरी कदम उठाए हैं। इसके अलावा सभी प्रशासनिक विभागों में भ्रष्टाचार पर सख्ती से अंकुश लगाने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं।
गणमान्य हस्तियों की मौजूदगी और स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ
राज्य के इस मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय अभिनेत्री तृषा, मुख्यमंत्री विजय के पिता एस. ए. चंद्रशेखर और तमिलनाडु मंत्रिमंडल के कई प्रमुख मंत्री व वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अपने संबोधन के आरंभ में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को स्वतंत्रता दिवस की आत्मीय शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जब आम नागरिकों को यह अहसास होने लगता है कि उनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव किया जा रहा है, तब समाज के भीतर एकता की एक जबरदस्त भावना जागृत होती है। लोग स्वतः ही एक मंच पर एकजुट होने लगते हैं। समाज में फैले तमाम जातिगत भेदभाव स्वतः समाप्त होने लगते हैं और जब जाति व धर्म के सभी बंधन टूट जाते हैं और संपूर्ण जनता कंधे से कंधا मिलाकर खड़ी हो जाती है, तो वही राष्ट्र की सच्ची और वास्तविक स्वतंत्रता होती है।

