नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापकीय नेतृत्व की ओर से एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसके तहत आगामी पर्व-त्योहारों के मद्देनजर सभी विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से स्थगित करने की घोषणा की गई है। पार्टी के इस फैसले से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और इस कदम को आगामी त्योहारों के परिवेश से जोड़कर देखा जा रहा है।
त्योहारों के मद्देनजर प्रदर्शनों पर लगाई गई रोक
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी करते हुए यह आधिकारिक घोषणा की कि उनकी पार्टी आगामी दिवाली तक किसी भी प्रकार का कोई विरोध प्रदर्शन या आंदोलन नहीं करेगी। उन्होंने अपने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से विशेष रूप से यह अपील की है कि वे इस पावन पर्व के मौसम में अपनी राजनीतिक व्यस्तताओं को छोड़कर अपने परिवार, बच्चों और सगे-सम्बन्धियों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय व्यतीत करें।
परिवारों की चिंता और दिल्ली की घटनाओं का जिक्र
अपने संदेश में अभिजीत दिपके ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में घटी घटनाओं और उसके बाद हुई कार्रवाई के कारण उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के परिजन खासे चिंतित और परेशान हैं। उन्होंने कहा कि जिन्हें पार्टी में प्यार से कॉकरोच कहकर संबोधित किया जाता है, उन सभी को अब कुछ दिनों के लिए इन विरोध प्रदर्शनों से अनिवार्य रूप से ब्रेक लेना चाहिए। उन्होंने यह भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि न केवल उनके अपने माता-पिता, बल्कि सीजेपी के अन्य प्रमुख नेताओं जैसे सौरव दास और आशुतोष रांका के परिवार वाले भी मौजूदा हालात को लेकर काफी तनाव में हैं।
चुनावी आयोग के खिलाफ था प्रदर्शन का आह्वान
उल्लेखनीय है कि इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी और विभिन्न विपक्षी दलों ने मिलकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन करने का खुला आह्वान किया था, जिसके बाद दिल्ली प्रशासन और पुलिस द्वारा कड़ी कार्रवाई की गई थी। इसी पृष्ठभूमि में अब पार्टी ने फिलहाल नरमी बरतने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री पर लगाया गया गंभीर आरोप
वीडियो संदेश के अंत में सीजेपी संस्थापक ने केंद्र सरकार और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सलाखों के पीछे रखने तथा उन्हें लंबे समय तक जेल में कैद रखने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा संपूर्ण सरकारी तंत्र और मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।

