Thursday, April 18, 2024

बेरोजगारी से लड़ रही युवा पीढ़ी के लिए मिसाल बनी देवघर की बेटी राधा…

झारखंड में महादेव की नगरी देवघर इन दिनों एक खास बात के लिए चर्चा में है, वो खास बात है यहां की मिट्टी की खुशबू से भरे चाय के प्याले की .ये प्याला केवल अपने स्वाद  में ही खास  नहीं है बल्कि इसे बनाने वाले मेहनत कश हाथ के कारण खास है .

देवघर के बाजला महिला कॉलेज के बाहर एक युवती ठेले पर एक पोस्टर के साथ नजर आती है.नाम है राधा यादव की.राधा यादव देवघर के ही कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएट यानी MA है.पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद एक लड़की चाय का ठेला लगाये नजर आये तो ये देखने वालों में कौतूहल पैदा करता है, क्योंकि आम तौर पर ये देखने को मिलता है कि उच्च शिक्षा के बाद युवक युवतिया नौकरियों की तरफ जाते हैं,ताकि एक नियमित आय मिल सके. राधा का भी यही ख्याल था कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर लेने का बाद उसे कोई अच्छी नौकरी मिल जायेगी और परिवार का भरण पोषण होगा लेकिन पोस्ट ग्रेजुएट होने के बावजूद ऐसा कुछ नहीं हुआ.सरकारी संस्थानों में  काम का अवसर नहीं मिला लेकिन राधा जैसी बेटियां मुसीबतों के सामने घुटने नहीं टेकती हैं.

राधा ने तय किया  कि वो  सरकारी नौकरी के इंतजार मैं वक्त गंवाने की जगह अपने लिए खुद काम के अवसर तलाशेगी और आत्मनिर्भर बनेगी.फिर किया था..राधा ने  बहुत ही कम लागत के साथ देवघर के महिला कॉलेज के सामने चाय की ठेली लगानी शुरु कर दी.नौकरी नहीं मिली तो राधा ने महिला कॉलेज के सामने ही चाय की दुकान खोली और बन गई पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली.

राधा किसी संभ्रांत परिवार से MBA पास की हुई पोस्ट ग्रेजुएट नहीं है 

राधा यादव देवघर के कोठिया गांव की रहने वाली एक साधारण किसान पिता की बेटी है. घर में मां,पांच बहन और एक भाई है.साधारण किसान परिवार से होने के कारण पिता को उम्मीद थी कि उच्च शिक्षा दिलाने के बाद बेटी को अच्छी नौकरी मिलेगी. लेकिन जब नौकरी की कोई उम्मीद नहीं दिखी तो राधा ने महिला महाविद्यालय के सामने ही पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली के नाम से  दुकान खोल ली.

काम के पीछे क्या है सोच..

इस दुकान के पीछे अपनी सोच के बारे में राधा बताती हैं कि यह एक महज चाय की दुकान नहीं बल्कि ‘बेटी किसी से पीछे नहीं’ और ‘कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता’ यह बताने की एक कोशिश है.

राधा सुबह 6:00 बजे अपने गांव से स्कूटी पर समान लेकर दुकान पहुंचती है और मिट्टी के बर्तन में घर जैसी चाय बनाकर लोगों को पिलाती है.राधा ने जब महिला कॉलेज के सामने दुकान खोली तो उसे उम्मीद थी कि कॉलेज की लड़कियां आगे आयेंगी और उनके मदद करेंगी शुरु शुर में ऐसा कुछ नहीं हुआ. शुरूआती दिनों में छात्राएं इस दुकान पर नहीं आती थी. लेकेिन हिम्मत की धनी राधा ने मेहनत का साथ नहीं छोड़ा. एक बेटी के हौसले को देखते हुए आम और खास लोग यहां रुकने लगे और देशी चाय का आनंद लेने लगे.धीरे-धीरे कॉलेज की छात्राएं भी इस दुकान की तरफ आने लगी और चाय की चुस्की लेने लगी.

कहां से मिली प्रेरणा…

राधा बताती है कि पटना में एक छात्रा ने ग्रेजुएट चाय वाली नाम से दुकान खोली थी.Youtube पर उसका वीडियो देखने के बाद ये आइडिया आया. राधा पोस्ट ग्रेजुएट है ऐसे में इसकी दुकान भी खास है. दुकान के सामने पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली का बोर्ड लगा है और नीचे देवघरिया भाषा में “चाय पीयो” लिखा है और ठीक उसके नीचे मिट्टी के बर्तन इस्तमाल करने का स्लोगन लिखा है जो लोगों को बहुत पसंद आ रहा है.

राधा मिट्टी के बर्तन में सोंधी खुशबू के साथ चाय परोसती है. धीरे-धीरे इनकी दुकान अच्छी चलने लगी है. एक दिन में कम से कम 200 कप चाय तो बिक ही जाती है . इस पूरे मामले में दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ जहां राधा की दुकान खास तरीके से मशहूर हो रही है, वहीं इसके बारे में उसके पिता को कुछ पता नहीं है कि लेकिन उसके काम में मां का पूरा समर्थन मिल रहा है.परिवार के दूसरे लोग भी अब उसे समर्थन कर रहे हैं.राधा को विश्वास है कि जिस तरीके से मां और परिवार के अन्य लोग उसको सपोर्ट कर रहे हैं, पिता को जब इसकी जानकारी होगी तो पिता भी उसके काम को सराहेंगे .राधा यादव को पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी नहीं मिलने का मलाल जरूर है लेकिन यह बेरोजगार की श्रेणी में नहीं है इसकी खुशी दिल में जरूर है.

पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली की दुकान धीरे-धीरे लोगों के जहन में बसने लगी है पहले एक दिन में 10 कप से ज्यादा चाय नहीं बिकती थी लेकिन अब  कम से कम 200 कप तो बिक ही जाती है.इस इलाके में काम काज करने वाले के साथ साथ स्थानीय लोग राधा की चाय को काफी पसंद कर रहे हैं.

राधा का चाय बनाने का तरीका बेहत खास है..

राधा की चाय पूरी तरीके से देसी तरीके से बनाई जाती है.मिट्टी के बर्तन में उबाली हुई चाय बड़े प्यार से लोगों को परोसा जाता है. बेटी के बुलंद हौसले को देखकर लोग आकर्षित हो रहे हैं और  आते जाते कम से कम एक कप चाय तो पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली से जरूर पीते हैं.

लोगों को खूब पसंद आ रही है राधा की टैगलाइन

“मिट्टी की प्याली में चाय पिया करो इसी बहाने देश की मिट्टी को चूमने का अवसर मिलेगा” लोगों को काफी प्रभावित कर रही है

पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली राधा यादव ने चाय दुकान खोलकर ना सिर्फ रोजी रोटी का एक जरिया तलाश किया है बल्कि समाज को एक बेहतर संदेश दिया है.राधा ने समाज औऱ उससे भी आगे अपनी पीढ़ी के युवाओं को संदेश दिया है कि- मेहनत करने वालों के लिए मुश्किलें कभी रास्ते का रोड़ा नहीं बनती है.आज के युवाओं के लिए मिसाल है राधा..

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