Thursday, July 2, 2026
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फ्रीबीज पर खर्च के लिए सरकार के पास पैसे की कमी नहीं लेकिन जजों को देने के लिए उनके पास पैसा नहीं – सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

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Supreme Court Freebies
Supreme Court Freebies

Supreme Court Freebies :  देश भर के निचली अदालतों में काम कर रहे जजों के वेतन और पेंशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों की सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग कोई काम नहीं करते, उनके लिए आपके पास पैसे हैं और जब जजों के वेतन और पेंशन का सवाल आता है तो आर्थिक दिक्कतों का हवाला देने लगते हैं.

Supreme Court Freebies : चुनाव आते ही राजनीतिक पार्टियां मुफ्त बांटने की घोषणाएं करने लगती हैं… 

दरअसल साल 2015 में ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन की तरफ से निचली अदालातों में काम करने वाले  जजों के वेतन और पेंशन संबंधी अनियमितता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई थी. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी आर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने खास कर दिल्ली में होने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि – चुनाव आते ही लाडली बहन जैसी योजनाओं की घोषणा शुरू हो जाती है,जहां लाभार्थियों को हर महीने एक तय रकम देने की बात की जाती है. दिल्ली में पार्टियां सत्ता में आने पर हर महीने 2500 रुपए तक देने का वादा कर रही हैं.

जजों के वेतन संबंधी याचिका पर होगी रेगुलर सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले पर रेगुलर सुनवाई होगी. कोर्ट ने इस मामले में अपनी सहायता के लिए वरिष्ठ वकील के परमेश्वर को एमिकस क्यूरी बनाया है. इस सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कहा कि राज्य सरकारों की तरफ से दी जाने वाली फ्रीबिज एक अस्थायी व्यवस्था है, जबकि  वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी एक स्थायी बात है.इसका राजस्व पर असर होता है इसलिए राजस्व पर इसके असर पर विचार करना ज़रूरी है.

केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यों वाली बेंच (जस्टिस गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह ) को आश्वस्त करते हुए एटर्नी जनरल वेंकटरमनी ने कहा कि इस संबंध में जल्द ही केंद्र सरकार एक अधिसूचना लाने पर विचार कर रही है, जिससे याचिका में उठाई गई चिंताओं का हल हो सकेगा. केंद्र सरकार की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भविष्य में सरकार अगर ऐसा करती है, कोर्ट को तो इसकी जानकारी दी जाये, चूंकि ये मामला काफी समय से लंबित है, इसलिए अब इसकी सुनवाई स्थगित नहीं की जाएगी.