नई दिल्ली : काशी के ज्ञानवापी परिसर में व्यासजी तहखाने में पूजा की अनुमति के खिलाफ मस्जिद कमेटी की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने निचली अदालतों के आदेश पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पूजा पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि पूजा के कारण नमाज प्रभावित नहीं हुई है.
VIDEO | Gyanvapi Mosque case: Here's what advocate Vishnu Shankar Jain said on Supreme Court ordering status quo on namaz in mosque and Hindu worship in 'Tehkhana' (Cellar).
"The honourable Supreme Court heard the matter at length. The matter was filed by Anjuman Intezamia… pic.twitter.com/9RtRZnn2GQ
— Press Trust of India (@PTI_News) April 1, 2024
ज्ञानवापी में पूर्ववत जारी रहेगी पूजा
हलांकि मस्जिद कमेटी की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ता शैलेंद्र व्यास को नोटिस जारी किया है.शैलेंद्र व्यास को अदालत ने 30 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि अगले आदेश तक यथास्थिति बनाये रखी जाये, यानी हाइकोर्ट और लोअर कोर्ट के आदेश के मुताबिक ज्ञानवापी परिसर के व्यासजी तहखाने में पूजा अर्चन पूर्ववत जारी रहेगी.अजुमन इस्लामिया मस्जिद कमेटी की याचिका पर अब अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में होगी.
सीजेआई ने अपने फैसले में कहा…
ज्ञानवापी पर मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ की कोर्ट में हुआ. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि ज्ञानवापी के तहखाने का द्वार दक्षिण दिशा है वहीं मस्जिद का प्रवेश द्वार उत्तर की ओर से हैं. दोनों एक दूसरे को प्रभावित नहीं करते हैं,इसलिए ये आदेश देते है कि पूजा और नमाज दोनों साथ साथ चल सकते हैं.
मस्जिद कमेटी क्यों पहुंचा सुप्रीम कोर्ट ?
ज्ञानवापी परिसर में पूजा के खिलाफ मस्जिद कमिटी की याचिका पर फैसला देते हुए इलाहाबाद हाइ कोर्ट ने इसे लागू करने के लिए जिला प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया था, मस्जिद कमेटी का कहना है कि अदालत के एक सप्ताह के समय का इंतजार नही किया और सरकार ने उसे अगले दिन ही लागू कर दिया. हाइकोर्ट से भी राहत नहीं मिली इसलिए याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे और सुप्रीम कोर्ट से राहत की अपील करते हुए व्याजसी तहखाने में जारी पूजा पर तत्काल रोक लगाने की मांग कर रहे थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है.





