Monday, July 22, 2024

राजस्थान कांग्रेस संकट: क्या नरम पड़ गए गहलोत गुट के स्वर?

राजस्थान में कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव के लिए मुख्यमंत्री गहलोत की दावेदारी पेश करने के बाद शुरु हुआ विवाद थोड़ा नरम पड़ गया है. राजस्थान के मुख्यमंत्री को लेकर मचे घमासान में एक वक्त तो ऐसा लग रहा था कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार तो जाएगी ही जाएगी लेकिन प्रदेश में कांग्रेस पार्टी भी दो फाड़ हो जाएंगी. कांग्रेस के विधायकों का दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने से इनकार करने और विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद ऐसा लगा था कि विधायक आलाकामान के साथ दो-दो हाथ करने का मन बना चुकें है. लेकिन अब गहलोत खेमे के स्वर थोड़े नरम हुए है वो सचिन पायलट के खिलाफ अपने तर्क रखते हुए ये कह रहे है कि आखिरी फैसला दिल्ली में होगा.

सचिन से बैर बरकरार, आलाकमान से नहीं नाराज़
राजस्थान में गहलोत गुट के जो विधायक पहले पर्यवेक्षकों से मिलने तक तैयार नहीं थे वो अब आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. वो सचिन पायलट पर मुखर है पर दिल्ली के प्रति नरम रुख दिखा रहे हैं. सरकार में मंत्री महेश जोशी ने सचिन पायलट पर निशाना साधा और कहा कि “ हमारी मांग है कि जिन्होंने कांग्रेस को कमज़ोर करने की और सरकार गिराने की कोशिश की उनमें से किसी को भी CM के पद लिए न चुना जाए” इनके अलावा राजस्थान के एक और मंत्री शांति धारीवाल ने भी सचिन पयलट को ही निशाने पर लिया वो पहले कि तरह आलाकमान के खिलाफ बोलने से बचते नज़र आए. उन्होंने कहा “MLA गद्दारों को पुरस्कृत करना बर्दाश्त नहीं करेंगे. ऐसे व्यक्ति को CM बनाने के लिए एक महासचिव खुद प्रचार कर रहे हैं, ऐसे में ज़ाहिर तौर पर MLA को नाराज़ होना ही था. मेरे पास नाराज़ MLA के फोन आए. हम 34 दिन (2020) तक होटलों में इकट्ठा हुए थे आप उनमें से किसी को भी मुख्यमंत्री बनाओ. सोनिया जी जिसे कहेंगी उसे मुख्यमंत्री बनाया जाएगा”

महिला विधायकों ने किया इस्तीफा देने से इनकार
राजस्थान में दबाव की राजनीति के बीच बगरु से कांग्रेस एमएलए गंगा देवी का इस्तीफा देने की बात को गलत बताना गहलोत गुट के लिए काफी शर्मनाक रहा. गंगा देवी ने समाचार एजेंसी से कहा कि “चिट्ठी के विषय में मुझे कोई जानकारी नहीं है मैं वहां देर से पहुंची थी. मैंने चिट्ठी नहीं पढ़ी थी, मैंने इस्तीफा नहीं दिया, आलाकमान जो फैसला करेंगे हम उसके साथ हैं. पर्यवेक्षक से हमारी मिलने की बात थी लेकिन हम नहीं जा सके.”
वैसे बाद में इसपर गहलोत सरकार में मंत्री ने सफाई दी उन्होंने कहा “दो दिन पहले विधायक दल की बैठक हुई थी अचानक फिर से बैठक आ गई जिस पर लोगों के मन में सवाल आया कि फिर से बैठक क्यों बुलाई गई है. 7 बजे बैठक थी और हमने लोगों को धारीवाल जी के घर पर 5 बजे विचार-विमर्श के लिए बुलाया. वहां पर सारी बातें साफ तरीके से हुई और सभी विधायकों ने हमारी बात का समर्थन किया. मैं नहीं समझता कि किसी भी विधायक ने बिना पढ़े पत्र पर हस्ताक्षर किया और अगर किसी ने बिना पढ़े हस्ताक्षर किया है तो वे अध्यक्ष से जाकर मिल सकते हैं.”

पर्यवेक्षकों ने की अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात
विधायकों के पर्यवेक्षकों से मिलने से इनकार और मीडिया में की गई बयानबाज़ी से नाराज़ मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन ने कहा कि “सार्वजनिक रूप से मुखर रहे नाराज विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने पर निर्णय पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर अंतरिम प्रमुख द्वारा कार्रवाई के बाद लिया जाएगा” इसके साथ ही इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सोनिया गांधी के लिखित रिपोर्ट मांगने से भी मामला शांत हुआ है.

सचिन पयलट क समर्थक में शुरु हुई बयानबाजी
सोमवार तक सिर्फ गहलोत खेमा बयानबाजी कर रहा था. लेकिन सोमवार देर शाम से पायलट समर्थक भी मैदान में आ गए. पायलट को अपना समर्थन दिखाने के लिए कांग्रेस विधायक जयपुर में उनके घर पहुंचे. पायलट समर्थक विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा का तर्क है कि राजस्थान में 2023 चुनाव के लिए संगठन का पुनर्गठन हो रहा है. शीर्ष नेतृत्व ही सीएम चेहरा तय करेगा. इसी तरह राजस्थान सरकार में मंत्री राजेंद्र सिंह गुहा ने कहा “मेरी निजी राय में राजस्थान का मुख्यमंत्री सचिन पायलट के अलावा दूसरा और कोई नहीं है.” अपना पक्ष रखने खुद सचिन पायलट भी दिल्ली पहुंच गए है.

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