मेलोडी महज टॉफी नहीं बल्कि चीन के लिए रचा गया चक्रव्यूह

नई दिल्ली। दुनिया जब ‘मेलोडी’(पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी) के मीम्स और सोशल मीडिया रील्स के शोर-शराबे में डूबी हुई थी, ठीक उसी वक्त पर्दे के पीछे एक बड़ा कूटनीतिक खेल खेला जा चुका था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिन्होंने चीन की घेराबंदी पूरी तरह सेट कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम से बीजिंग को बड़ा झटका लगा है, जिसकी शुरुआत कुछ समय पहले द ग्रेट इटली डिवोर्स से हुई थी। कुछ साल पहले इटली, चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल होने वाला एकमात्र जी-7 देश बना था। हालांकि, जॉर्जिया मेलोनी ने सत्ता में आते ही चीन के इस कर्ज के जाल को पहचान लिया और इटली को आधिकारिक तौर पर इससे बाहर निकाल लिया। चीन को ठेंगा दिखाने के बाद इटली को एशिया में एक मजबूत और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार की तलाश थी, जो चीन की जगह ले सके। यहीं पर न्यू इंडिया की एंट्री हुई। मोदी और मेलोनी की शानदार केमिस्ट्री दरअसल दुनिया को एक सीधा संदेश है कि इटली अब अपनी पूरी एशियाई रणनीति को बीजिंग से हटाकर नई दिल्ली पर शिफ्ट कर रहा है।
वैश्विक व्यापार के नक्शे पर नजर डालें तो भारत के लिए इटली की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। भारत जब अपना सामान, टेक्नोलॉजी और एनर्जी यूरोप के बाजारों में भेजना चाहता है, तो उसके लिए भूमध्य सागर ही सबसे मुख्य रास्ता है, जिसके केंद्र में इटली स्थित है। इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए इटली खुद को भारतीय व्यापार के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित कर रहा है। इटली के बंदरगाहों को भारत के मैन्युफैक्चरिंग बूम से जोड़कर दोनों देशों ने आने वाले 50 सालों की आर्थिक सुरक्षा का इंतजाम कर लिया है, जो चीन की ट्रेड दादागीरी को सीधी चुनौती है।
इसके अलावा, दशकों से तैयार हथियार खरीदने वाले भारत के साथ मेलोनी सरकार ने एक नया और स्मार्ट गेम शुरू किया है। इटली अब पीएम मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के तहत भारत की जमीन पर ही एडवांस रडार सिस्टम और मैरीटाइम डिफेंस जैसे क्षेत्रों में डिफेंस इक्विपमेंट्स का सह-उत्पादन करेगा। सोशल मीडिया पर दिखने वाली क्यूट और मजेदार मेलोडी सेल्फी तो सिर्फ एक पैकेजिंग है। इसके पीछे की असली हकीकत यह है कि यूरोप में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए भारत को इटली की जरूरत है और चीन को आर्थिक व रणनीतिक टक्कर देने के लिए इटली को भारत का साथ चाहिए। दोनों देशों ने मिलकर ड्रैगन के खिलाफ जो चक्रव्यूह रचा है, उसने बीजिंग की रातों की नींद उड़ा दी है।

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