जबलपुर: मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन ने छावनी (केंट) क्षेत्र के नागरिकों की बुनियादी समस्याओं के जल्द निपटारे के लिए केंट प्रशासन के सामने एक बड़ी मांग रखी है। संगठन ने केंट बोर्ड प्रबंधन को एक पत्र सौंपकर मांग की है कि छावनी क्षेत्र में हर हफ्ते नियमित रूप से जनसुनवाई की व्यवस्था शुरू की जाए। इस साप्ताहिक जनसुनवाई में ब्रिगेडियर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और सभी संबंधित विभागों के बड़े अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य हो, ताकि जनता की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा किया जा सके।
पार्षदों के चुनाव न होने से बढ़ी नागरिकों की मुश्किलें
संगठन के अध्यक्ष डॉ. अजय वाधवानी समेत प्रमुख पदाधिकारियों जैसे आशीष त्रिपाठी, भावना निगम, डॉ. अभिषेक जैन, आशुतोष चतुर्वेदी, रोशन मंध्यानी, अमित खत्री, डॉ. आशीष डेंगरा, डॉ. आनंद बरहरानी, डॉ. कमल विश्वास और डॉ. श्रीकांत साहू ने बताया कि वर्तमान में छावनी क्षेत्र में निर्वाचित पार्षदों के चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। जन प्रतिनिधियों के न होने के कारण आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को उठाने और उन्हें हल कराने वाला कोई नहीं है। ऐसी विषम परिस्थितियों में केंट के प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आम जनता से सीधे जुड़ने के लिए हर सप्ताह जनसुनवाई का आयोजन किया जाना बेहद जरूरी हो गया है।
नियमित जनसुनवाई से सुधरेगी पानी, सड़क और सफाई व्यवस्था
मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन का कहना है कि छावनी परिषद में नियमित जनसुनवाई शुरू होने से क्षेत्र की पानी सप्लाई, साफ-सफाई, टूटी सड़कें, स्ट्रीट लाइट की खराबी, रिहायशी इलाकों की दिक्कतें और प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी शिकायतों का तय समय सीमा में समाधान हो सकेगा। इससे आम जनता और सैन्य प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा, जिससे छावनी क्षेत्र के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही बढ़ेगी। संगठन ने जनता के हित को ध्यान में रखते हुए छावनी परिषद प्रशासन और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने की पुरजोर अपील की है।

